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Success Story: खंडवा में 73 साल से लगातार चल रही यह दुकान आज भी इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, ईमानदारी और गुणवत्ता से छोटा सा काम भी पीढ़ियों तक चल सकता है. अब खंडेलवाल परिवार की तीसरी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है, ताकि आने वाले समय में भी यह स्वाद और परंपरा कायम रहे.
Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में एक ऐसी दुकान है, जहां सिर्फ गन्ने का रस ही नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों की मेहनत, विश्वास और स्वाद की विरासत भी मिलती है. यह कहानी “दीपक रसराज” शॉप की है, जो 73 साल से शहरवासियों की प्यास बुझा रही है. कभी रेलवे स्टेशन पर महज ₹6 किराए से शुरू हुई यह छोटी सी दुकान आज भी उसी भरोसे और स्वाद के साथ चल रही है. इस दुकान को अब तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है, जिसने अपने दादा के इस काम को सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि परंपरा बना लिया है.
रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ था सफर
दुकान संचालक मुकेश खंडेलवाल बताते हैं कि इस जूस सेंटर की शुरुआत उनके पिताजी ने करीब 73 साल पहले की थी. उस समय उनके पिताजी खंडवा में डीजल मेकेनिक का काम करने आए थे, लेकिन नौकरी में मन नहीं लगा. इसके बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन के पास एक छोटी सी जगह किराए पर लेकर गन्ने के रस और जूस की दुकान शुरू की. उस समय दुकान का किराया सिर्फ ₹6 महीना था. मुकेश बताते हैं कि उनके पिताजी मूल रूप से होशंगाबाद के रहने वाले थे और मेहनत के दम पर उन्होंने खंडवा में अपनी पहचान बनाई. पिताजी के हाथों के जूस का स्वाद इतना मशहूर हुआ कि धीरे-धीरे लोग दूर-दूर से यहां जूस पीने आने लगे.
खंडवा में सबसे पहले मशीन हमने लगाई
आज इस दुकान को मुकेश खंडेलवाल और उनके बड़े भाई दीपक खंडेलवाल मिलकर चला रहे हैं. पहले यह दुकान रेलवे स्टेशन पर थी, लेकिन अब यह पडावा क्षेत्र में जैन नर्सिंगहोम के पास संचालित हो रही है. दुकान पर आज भी वही पुराना स्वाद और गुणवत्ता बरकरार है, जिसकी वजह से यहां हर दिन ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. मुकेश बताते हैं कि उनके पिताजी पहले हाथ से चलने वाली मशीन से गन्ने का रस निकालते थे. बाद में उन्होंने खंडवा में सबसे पहले इलेक्ट्रिक मशीन लगाई थी, जो आज भी दुकान पर मौजूद है. यह मशीन करीब 50 साल पुरानी है और डेढ़ क्विंटल वजन की है. आज के समय में ऐसी मजबूत मशीन मिलना लगभग नामुमकिन है.
12 महीने मिलता जूस, गर्मी में सबसे ज्यादा भीड़
इस दुकान की खास बात यह है कि यहां सिर्फ गर्मी में ही नहीं, बल्कि पूरे 12 महीने अलग-अलग प्रकार के जूस मिलते हैं. गर्मी के मौसम में गन्ने का रस सबसे ज्यादा बिकता है, जबकि बाकी समय पाइनएप्पल जूस, नारियल पानी और अन्य फ्रूट जूस की अच्छी मांग रहती है. इसके अलावा खंडेलवाल परिवार नारियल पानी का होलसेल कारोबार भी करता है, जिससे सालभर उनकी आय बनी रहती है.
इसी दुकान से बनाया घर और परिवार का भविष्य
मुकेश खंडेलवाल बताते हैं कि इस छोटी सी दुकान ने उनके परिवार को सब कुछ दिया. इसी जूस सेंटर से उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की शादी की, मकान बनाया और परिवार को मजबूत आर्थिक आधार दिया. वह कहते हैं कि यह दुकान उनके लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि परिवार की पहचान है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें