40 दिनों तक दुख-तपस्या और पश्चाताप, ईसाइयों का पवित्र चालीसा काल शुरू

40 दिनों तक दुख-तपस्या और पश्चाताप, ईसाइयों का पवित्र चालीसा काल शुरू


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Khandwa News: खंडवा चर्च के फादर जेसी डिवाइन ने लोकल 18 को बताया कि यह 40 दिन मसीह समाज के लिए बहुत ही पवित्र और आत्मशुद्धि का समय होता है. इस बार चालीसा काल की शुरुआत 18 फरवरी से हुई है, जिसका पहला दिन ‘ऐश वेडनेसडे’ कहलाता है.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में ईसाई समाज के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में से एक 40 दिवसीय चालीसा काल (लेंट) की शुरुआत हो चुकी है. यह समय ईसाई समाज के लिए तपस्या, उपवास, प्रार्थना और आत्मचिंतन का होता है. इस दौरान समाज के लोग अपने जीवन की गलतियों पर पश्चाताप करते हैं और ईश्वर की आराधना में अधिक समय बिताते हैं. इन 40 दिनों में चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और लोग सादगी भरा जीवन अपनाते हैं. ईसाई समाज में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि यह 40 दिन प्रभु ईसा मसीह के दुख, बलिदान और तपस्या की याद में मनाए जाते हैं. इस दौरान समाज के लोग अपने खानपान और दिनचर्या में संयम रखते हैं. कई लोग उपवास रखते हैं, कुछ लोग दिन में एक समय ही भोजन करते हैं जबकि कई लोग मांसाहार और मनोरंजन जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं.

लोकल 18 से बातचीत में खंडवा चर्च के फादर जेसी डिवाइन ने बताया कि यह 40 दिन मसीह समाज के लिए बहुत ही पवित्र और आत्मशुद्धि का समय होता है. इस वर्ष चालीसा काल की शुरुआत 18 फरवरी से हुई है, जिसका पहला दिन ‘ऐश वेडनेसडे’ कहलाता है. इस दिन लोगों को यह याद दिलाया जाता है कि इंसान मिट्टी से बना है और एक दिन उसे मिट्टी में ही मिल जाना है, इसलिए जीवन में अच्छे कर्म करना और ईश्वर के मार्ग पर चलना जरूरी है.

हर शाम विशेष प्रार्थना और प्रवचन
फादर ने बताया कि इन 40 दिनों में प्रतिदिन शाम को विशेष प्रार्थना और प्रवचन होते हैं. इन प्रवचनों में पश्चाताप, विश्वास, उपासना और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया जाता है. समाज के लोग अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार करते हैं और संकल्प लेते हैं कि आगे ईश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीएंगे. इस अवधि के अंतिम सप्ताह को दुखभोग सप्ताह कहा जाता है, जिसमें प्रभु ईसा मसीह के अंतिम दिनों को याद किया जाता है. इस दौरान विशेष आराधना होती है और प्रभु के बलिदान को स्मरण किया जाता है. इसके बाद पुनरुत्थान दिवस के साथ यह 40 दिन का पवित्र काल समाप्त होता है.

आत्मशुद्धि, त्याग और ईश्वर के करीब आने का समय
ईसाई समाज के लोगों का मानना है कि यह 40 दिन आत्मशुद्धि, त्याग और ईश्वर के करीब आने का समय होता है. इस दौरान लोग अपने देश, समाज और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी विशेष प्रार्थना करते हैं. यही वजह है कि इस परंपरा को ईसाई समाज में सबसे खास और पवित्र माना जाता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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