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Tomato Farming: मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच टमाटर की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. विशेषज्ञ किसानों का मानना है कि अगर नर्सरी को नियंत्रित वातावरण में तैयार कर समय पर हार्डनिंग की जाए तो पौधों की ग्रोथ तेज होती है और उत्पादन लागत घटती है. सही प्रबंधन से कम समय में बाजार में ताजा फसल उतारी जा सकती है.
Tomato Farming: मौसम धीरे-धीरे गर्मी की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में अगर किसान सही फसल और सही तकनीक का चयन करें तो अच्छी कमाई कर सकते हैं. क्षेत्र में टमाटर की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. खास बात यह है कि अगर बीज का चयन स्थानीय तापमान के अनुसार किया जाए और नर्सरी वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जाए तो कम समय में बेहतर उत्पादन संभव है. लोकल 18 से बातचीत में किसान अंशुमान सिंह ने टमाटर की उन्नत खेती के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि टमाटर की सफल खेती के लिए सबसे जरूरी है सही सीड सिलेक्शन. हर क्षेत्र का तापमान अलग होता है इसलिए उसी के अनुरूप वैरायटी का चुनाव करना चाहिए. उन्होंने फरवरी लास्ट में अपनी टमाटर की नर्सरी तैयार की है जिसमें साहो और अभिलाष वैरायटी लगाई गई है. ये दोनों हाइब्रिड बीज हैं और हाई यील्ड देने के लिए जाने जाते हैं. इनकी खासियत यह है कि इनमें हीट टॉलरेंस जीन मौजूद होते हैं जिससे ये मार्च की बढ़ती गर्मी को भी सहन कर लेते हैं.
ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार और वैज्ञानिक नर्सरी तैयारी
अंशुमान ने बताया कि बीज लगाने से पहले उन्हें ट्राइकोडर्मा से ट्रीट किया गया. इसके बाद 104 होल वाले प्रो ट्रे में बीज लगाए जाएंगे. नर्सरी के लिए मिट्टी का मिश्रण तैयार करते समय 40 प्रतिशत कोकोपीट, 40 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट, 5 प्रतिशत वर्मी कोलाइटि और 5 प्रतिशत वर्मी परलाइट मिलाया जाना सबसे बेस्ट है. वहीं मिश्रण बनाते समय हल्का मॉइस्चर बनाए रखना जरूरी है जिससे बीज अंकुरण बेहतर हो सके. अब तैयार मिश्रण को हल्के हाथों से ट्रे में भरा जाता है और 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई वाले गड्ढों में ट्रीटेड बीज डाले जाते हैं. इस तरह करीब 10 ट्रे तैयार कर एक के ऊपर एक रखकर पालीथीन या तिरपाल से पूरी तरह ढक दिया जाता है. सामान्यतः 4 से 5 दिन में बीज अंकुरित हो जाते हैं लेकिन हर दो दिन में जांच करना जरूरी है. अंकुरण के बाद ट्रे को ग्रीन नेट के अंदर रखा जाता है.
हार्डनिंग प्रक्रिया से मजबूत बनते हैं पौधे
ट्रांसप्लांटेशन के पांचवें दिन से 20 दिनों तक सुबह-शाम नियमित सिंचाई की जाती है. 20वें दिन से हार्डनिंग प्रक्रिया शुरू होती है. पहले दिन शेड नेट एक घंटे के लिए खोला जाता है फिर अगले दिन दो घंटे और तीसरे दिन चार से पांच घंटे तक. वहीं चौथे दिन से शेड पूरी तरह हटा दिया जाता है. इस प्रक्रिया से पौधे खेत के वातावरण के अनुसार ढल जाते हैं और ट्रांसप्लांटिंग के समय स्ट्रेस नहीं झेलते.
50-55 दिन में शुरू हो सकती है तुड़ाई
रोपाई के बाद ट्रेंचिंग और समय-समय पर खाद प्रबंधन करना जरूरी है. हर 3-4 दिन में उर्वरक देने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है. एक एकड़ में लगभग 4000 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं. अगर पूरी प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई जाए तो 50 से 55 दिनों के भीतर टमाटर की तुड़ाई शुरू हो सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए और समय पर देखभाल की जाए तो टमाटर की खेती इस मौसम में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें