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अमर्त्यलोक टेल्स के बनाए इस डोम थिएटर में महाभारत की झलक पहली बार दिखाई गई, जिसे देखने के लिए भोपाल के लोग बेहद उत्साहित थे. इस डोम थिएटर में महाभारत की शॉर्ट फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण की वाणी को प्रसिद्ध अभिनेता सौरव राज जैन ने आवाज दी है. फिल्म देखते समय आपको ऐसा महसूस होता है.
भोपाल न्यूज: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार लोगों ने महाभारत को हाईटेक अंदाज में देखा. कुछ ऐसा जो शायद ही पहले देखा होगा. अमर्त्यलोक टेल्स द्वारा बनाए गए 360 डिग्री पौराणिक डोम थिएटर में लोगों ने पहली बार एक नया अनुभव किया. इस डोम थिएटर में छह मिनट की इमर्सिव फिल्म “नारायणः सर्वम्” प्रदर्शित की गई, जो भगवद्गीता के 12वें अध्याय पर आधारित है. इस पौराणिक डोम थिएटर में ऐसा अनुभव होता है कि दर्शक खुद को फिल्म का हिस्सा महसूस करते है. इस 360 डिग्री डोम थिएटर की खासियत जानिए अमर्त्यलोक टेल्स के नितिन गुप्ता से.
अमर्त्यलोक टेल्स के बनाए इस डोम थिएटर में महाभारत की झलक पहली बार दिखाई गई, जिसे देखने के लिए भोपाल के लोग बेहद उत्साहित थे. इस डोम थिएटर में महाभारत की शॉर्ट फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण की वाणी को प्रसिद्ध अभिनेता सौरव राज जैन ने आवाज दी है. फिल्म देखते समय आपको ऐसा महसूस होता है. जैसे आप महाभारत काल में पहुंच गए है. फिल्म का अंत भगवान श्रीकृष्ण के विराट विश्वरूप दर्शन के प्रभावशाली दृश्य के साथ होता है.
Gen-Z को संस्कृति से जोड़ने के लिए लाए ये कांसेप्ट
अमर्त्यलोक टेल्स के नितिन गुप्ता ने इस कांसेप्ट की शुरुआत के बारे में Local18 से बात करते हुए बताया कि हमारी शुरुआत युवा पीढ़ी को हमारी संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से हुई. कई चीजें आप फोन या टीवी पर नहीं देख सकते है. जैसे हमारी संस्कृति का अनुभव करना. नितिन ने बताया कि यह पौराणिक डोम थिएटर उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर विकसित किया है. उनका विचार था कि जब आज की Gen-Z रामायण या महाभारत देखे तो उन्हें असली फील आए. नितिन ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को हम पूरे देशभर में दिखाएंगे.
चारों तरफ महाभारत के दृश्य, 360 डिग्री का अनुभव
इस पौराणिक डोम थिएटर में महाभारत देखते समय आपको ऐसा अनुभव होता है. जैसे आपके चारों तरफ महाभारत काल ही चल रहा हो. ऐसा इसलिए महसूस होता है क्योंकि इस थिएटर में आप जिस जगह खड़े होते है. उससे लेकर आपके चारों तरफ स्क्रीन पर शॉर्ट फिल्म चलती है. राजधानी भोपाल में महाभारत का यह अनुभव बच्चों और बुजुर्गों सभी को बेहद पसंद आया है.