नई दिल्ली. कहते हैं क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन जब खिलाड़ी के तेवर टीम के मनोबल को ही LBW करने लगें, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जो हुआ, उसने भारतीय फैंस के जख्मों पर नमक छिड़क दिया है. वो 24-24 गेंदों के महज एक स्पेल नहीं थे, बल्कि भारतीय गेंदबाजी की पोल खोलने वाला ‘पोस्टमार्टम’ था.
एक तरफ वरुण चक्रवर्ती की फिरकी बेअसर रही, तो दूसरी तरफ ‘कुंग-फू’ पांड्या के हाथ से रन ऐसे फिसले जैसे कोई रेत. लेकिन मैच की हार से ज्यादा चर्चा उस ‘बदतमीजी’ की है, जो हार्दिक पांड्या मैदान पर अपने ही साथियों के साथ कर रहे हैं. क्या 2026 टी-20 वर्ल्ड कप की राह में हार्दिक का ‘ईगो’ सबसे बड़ा ब्रेकर बनने वाला है?
अहमदाबाद की वो काली रात: 8 ओवर, 92 रन और शर्मनाक हार
अहमदाबाद के मैदान पर जब दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज प्रहार कर रहे थे, तब भारतीय गेंदबाजी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. मैच का असली विलेन वो 8 ओवर रहे, जिसमें वरुण चक्रवर्ती और हार्दिक पांड्या ने मिलकर 92 रन लुटा दिए. वरुण चक्रवर्ती, जिन्हें मिस्ट्री स्पिनर कहा जाता है, उनकी मिस्ट्री अफ्रीकी बल्लेबाजों ने चंद गेंदों में सुलझा दी और उनके 4 ओवरों में 47 रन बटोर लिए. असली निराशा हार्दिक पांड्या से हुई एक अनुभवी ऑलराउंडर और लोकल हीरो की भूमिका निभा रहे हार्दिक ने 4 ओवर में 45 रन खर्च किए यानी इन दोनों ने मिलकर 48 गेंदों में जो 92 रन दिए, वही भारत की हार की असली वजह बने. जब आपके दो मुख्य गेंदबाज 11 से ज्यादा की इकोनॉमी से रन लुटाएंगे, तो दुनिया की कोई भी बल्लेबाजी लाइनअप उस पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा नहीं कर पाएगी.
मैदान पर ‘विलेन’ वाला बर्ताव: कुलदीप और सुंदर पर भड़ास क्यों?
मैच हारना एक बात है, लेकिन टीम की एकजुटता को सरेआम नीलाम करना दूसरी. सोशल मीडिया पर फैंस इस बात से भड़के हुए हैं कि हार्दिक पांड्या विकेट न मिलने या रन पड़ने पर अपना गुस्सा जूनियर्स और साथी खिलाड़ियों पर निकाल रहे हैं. कभी वो कुलदीप यादव को किसी बात पर खरी-खोटी सुनाते दिखते हैं, तो कभी वाशिंगटन सुंदर की फील्डिंग या गेंदबाजी पर भद्दे इशारे करते नजर आते हैं. क्रिकेट के गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या हार्दिक खुद को खेल से बड़ा समझने लगे हैं? एक सीनियर का काम गिरते हुए खिलाड़ियों को उठाना होता है, न कि उन्हें सरेआम बेइज्जत करना. कुलदीप और सुंदर जैसे मैच विनर खिलाड़ी अगर दबाव के क्षणों में अपने ही कप्तान की गालियां या गुस्सा सहेंगे, तो उनका प्रदर्शन गिरना लाजमी है.
2026 वर्ल्ड कप का मिशन या ‘ईगो’ का प्रदर्शन?
हार्दिक पांड्या का हालिया रवैया BCCI के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए अगर अहमदाबाद जैसी हार के बाद भी सबक नहीं लिया गया और उनके हीरोपंती के इस बर्ताव पर लगाम नहीं लगाई गई, तो वर्ल्ड कप का सपना एक बार फिर अधूरा रह सकता है. वरुण के 47 और हार्दिक के 45 रन तो स्कोरकार्ड पर दर्ज हो गए, लेकिन जो खटास ड्रेसिंग रूम में पैदा हो रही है, उसका हिसाब कौन देगा? भारतीय फैंस पूछ रहे हैं हार्दिक भाई, ये क्या कर रहे हो? मैच तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन टीम की मर्यादा और खिलाड़ियों का सम्मान दांव पर लगाना कहां की समझदारी है.