करेली की ये किस्म एटीएम! मात्र 55 दिनों में होने लगेगी कमाई, हर समय डिमांड

करेली की ये किस्म एटीएम! मात्र 55 दिनों में होने लगेगी कमाई, हर समय डिमांड


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करेली की ये किस्म एटीएम! मात्र 55 दिनों में होने लगेगी कमाई, हर समय डिमांड

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Agriculture News: कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को बताया कि करेली की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहती है. खेत की गहरी जुताई कर उसमें गोबर की सड़ी खाद या फिर वर्मी कंपोस्ट मिलाने से पौधों की बढ़वार काफी तेज होती है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में फरवरी का महीना सब्जी की खेती के लिए अनुकूल होता है. फरवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मार्च तक का मौसम करेला की उन्नत देसी किस्म करेली की बुवाई के लिए बेहद अनुकूल रहता है. इस दौरान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान और संतुलित नमी फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करते हैं. यही कारण है कि अब क्षेत्र के किसान पारंपरिक फसलों के साथ करेली की खेती को भी तेजी से अपना रहे हैं. सीधी के कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को बताया कि करेली अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत देसी किस्म है. इसकी बेल तेजी से फैलती है और बुवाई के लगभग 45 से 55 दिनों के भीतर पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. एक बार फल लगना शुरू होने के बाद 60 से 90 दिनों तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है. इस दौरान हर 3 से 4 दिन में तुड़ाई संभव है.

अवनीश पटेल ने बताया कि करेली की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहती है. खेत की गहरी जुताई कर उसमें गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाने से पौधों की बढ़वार तेज होती है. यदि किसान मचान पद्धति अपनाते हैं, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है. बेलों को सहारा मिलने से फल सीधे, साफ और आकर्षक बनते हैं, जिनकी बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.

करेली का भाव 20 से 40 रुपये किलो
उन्होंने आगे बताया कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में औसतन 80 से 100 क्विंटल तक पैदावार संभव है. मंडियों में करेली का भाव 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है जबकि सीजन की शुरुआत में कीमत 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इस आधार पर लागत निकालने के बाद किसान 70 हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं.

एक बेल में 35 से 40 फल
उन्होंने बताया कि US Agri Seed SW890 करेली किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. यह हाइब्रिड देसी करेली है. इसके फल आकर्षक हरे रंग के और 20 से 22 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. बुवाई के 55 से 60 दिन बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है और एक बेल में 35 से 40 फल तक लगते हैं, जिससे उत्पादन अधिक मिलता है. हालांकि बेहतर उत्पादन के लिए कीट और रोग प्रबंधन जरूरी है. फल मक्खी, लाल कद्दू बीटल और पत्ती धब्बा रोग से बचाव के लिए समय पर जैविक या अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए. टपक सिंचाई पद्धति अपनाने से पानी की बचत होती है और फसल को संतुलित नमी मिलती है, जिससे उपज और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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