खंडहर में बिजनेसमैन की जलती डेड बॉडी का राज: खूबसूरत पत्नी से जिस्मानी सबंध की चाहत में दोस्त बना कातिल, या कोई और था हत्यारा… – Madhya Pradesh News

खंडहर में बिजनेसमैन की जलती डेड बॉडी का राज:  खूबसूरत पत्नी से जिस्मानी सबंध की चाहत में दोस्त बना कातिल, या कोई और था हत्यारा… – Madhya Pradesh News




मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात भोपाल के एक बिजनेसमैन से जुड़े हाई प्रोफाइल मर्डर केस की। राजधानी भोपाल के सुनसान इलाके में खंडहर में मिली जली लाश से सनसनी फैल गई। पुलिस पड़ताल में जब लाश की पहचान सामने आई तो वह भोपाल का एक बड़ा कारोबारी निकला, जिसकी हत्या कर लाश को जला दिया गया था। पड़ताल में जैसे-जैसे इस केस की परतें खुलती गईं, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। व्यापार, परिवार और दोस्तों के साथ दिन बिताने वाले कारोबारी के कत्ल की शातिराना तरीके से साजिश रची गई थी। क्या था पूरा मामला? बिजनेसमैन की हत्या किसने और क्यों की? पुलिस कातिलों तक कैसे पहुंची? सिलसिलेवार पढ़िए पूरी कहानी…
11 नवंबर 2013 का दिन। शहर-भोपाल।
मप्र में चुनाव प्रचार अपने चरम पर था। ज्यादातर पुलिसकर्मी चुनावी ड्यूटी में व्यस्त थे। 11 नंवबर की रात भोपाल में चुनाव प्रचार का शोर थम चुका था। दीवाली के बाद से लगातार चुनावी ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी थोड़ी राहत महसूस कर रहे थे। पिपलानी थाना प्रभारी सुधीर अरजरिया दिनभर की ड्यूटी खत्म करने के बाद अगले दिन के ड्यूटी शेड्यूल की तैयारी कर रहे थे, तभी थाने में फोन की घंटी बजी। फोन पर सूचना मिली कि बरखेड़ा पठानी के एक खंडहर में एक युवक की अधजली लाश पड़ी है। वहीं से गुजर रहे एक आदमी को जलने की गंध आने पर उसने खंडहर में जाकर देखा तो उसके होश उड़ गए। जलती डेडबॉडी देखकर तुरंत उसने थाने में सूचना दी। पुलिस टीम ने डेडबॉडी के पास जाकर देखा तो गोली लगने के निशान थे। जलने के कारण पहचान मुश्किल थी। ऐसा लग रहा था कि किसी ने गोली मार कर हत्या की और पहचान छिपाने के लिए शव को जलाने की कोशिश की होगी। पुलिस को मृतक की पैंट की जेब से पांच हजार रुपए, सोने की अंगूठी और गैस एजेंसी की एक पर्ची मिली। गैस एजेंसी की पर्ची से हुई शिनाख्त रुपए और सोने की अंगूठी से ये साफ था कि ये मामला लूट का तो नहीं था। गैस की पर्ची से पुलिस ने गैस एजेंसी जाकर पता किया तो मनीष तख्तानी का नाम और पंचवटी कॉलोनी का पता सामने आया। जब पुलिस ने घर जाकर दिलीप तख्तानी को बताया कि उनके बेटे के नाम की पर्ची लाश की जेब से मिली है, तो पहले उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बेटा सुबह तो दुकान गया था। थोड़ी देर हो गई… दोस्तों के साथ होगा, लेकिन पुलिस के कहने पर उन्होंने मौके पर पहुंचकर देखा तो उनके भी होश उड़ गए। पहचानने में देर नहीं लगी, बेटे मनीष का ही शव था। पुलिस को ये समझ में आ चुका था कि ये मामला लूट का नहीं है। पैसे और सोने की अंगूठी सलामत थी। इस केस की सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। हत्या शातिर प्लानिंग से की गई थी। लाश के पास से कार और मोबाइल फोन गायब थे मनीष शहर के जाने-माने कारोबारी दिलीप तख्तानी का बेटा था। 11 नवंबर की सुबह बाकी दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। मनीष रोज की तरह जल्दी उठा, अखबार पढ़ा और नाश्ते के लिए पत्नी सपना ने आवाज लगाई तो नाश्ता किया। इसके बाद अपनी बेटी को गुड मॉर्निंग कह कर प्लायवुड शोरूम के लिए निकल गया। घर में सब कुछ सामान्य था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह घर से उसका आखिरी निकलना होगा। शाम ढली और देर रात तक मनीष घर नहीं लौटा। परिवार चिंतित था। पिता बार-बार फोन कर रहे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पत्नी सपना ने भी कई कॉल किए, लेकिन फोन नहीं उठा। इसके बाद पुलिस ने हत्या की जानकारी दी। मनीष के पिता ने पुलिस को बताया कि मनीष कार लेकर दुकान के लिए निकला था, लेकिन लाश के पास कार नहीं मिली। मोबाइल फोन भी गायब था। जांच में पुुलिस को मनीष के मोबाइल की आखिरी लोकेशन एमपी नगर चेतक ब्रिज के पास मिली। साफ हो गया कि कातिल ने कार में ही हत्या की और सबूत मिटाने के लिए खंडहर में ले जाकर शव जलाने की कोशिश की। कई एंगल से जांच, लेकिन कोई सुराग नहीं परिवार ने बताया कि मनीष को कई लोगों से पैसे लेने थे, इसलिए पुलिस ने इस एंगल से जांच शुरू की। व्यापारिक दुश्मनी, लूट, पारिवारिक विवाद… लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। पुलिस ने मनीष की एमपी नगर जोन-2 स्थित प्लायवुड की दुकान पर काम करने वाले नौकरों से पूछताछ की तो पता चला कि 11 नवंबर, 2013 की शाम को 4 बजे के आसपास मनीष के मोबाइल पर किसी का फोन आया था। फोन पर बात करने के बाद उन्होंने दुकान संभालने वाले अपने मामा विनोद तख्तानी से कहा था कि उन्हें लौटने में देर हो सकती है, इसलिए वह दुकान बंद कर देंगे। इतना कह कर मनीष अपनी कार से चले गए थे। फिर सामने आया मनीष के दोस्त हर्षप्रीत का नाम पुलिस की पूछताछ में हर्षप्रीत सलूजा का नाम सामने आया, जो मनीष का दोस्त था। हर्षप्रीत और मनीष के पारिवारिक संबंध थे, दोनों का परिवार पहले ईदगाह हिल्स में पड़ोस में रहता था। दोनों ही परिवारों का एकदूसरे के यहां आना-जाना था। हालांकि मनीष के घर सब कुछ सामान्य ही था। 2009 में खंडवा की रहने वाली सपना की शादी मनीष से हुई थी। दोनों की एक प्यारी बेटी भी थी और दोनों खुशहाल जिंदगी बिता रहे थे। पुलिस का शक मनीष के दोस्त हर्षप्रीत पर भी था। सवाल था कि हर्षप्रीत ने मनीष की पत्नी सपना को पाने के लिए उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची या हत्यारा कोई और ही था। उस दिन शाम 4 बजे मनीष को किसका फोन आया था… जानने के लिए पढ़िए कल क्राइम फाइल्स का पार्ट 2



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