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Balaghat News: बारिश के दिनों में डर बना रहता था कि कहीं स्कूल की छत गिर न जाए. वहीं बारिश में टपकती छतों के नीचे बाल्टी और बर्तन तक रखना पड़ता था. ज्यादा बारिश होने पर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती थी.
बालाघाट. आमतौर आप हमेशा इस तरह की खबरें सुनते रहते होंगे कि बच्चे टपकती छतों के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं लेकिन इस बार हम आपको बदलाव की खबर बता रहे हैं. अब टपकती छत या जर्जर स्कूल की नहीं बदलती तस्वीरों की खबर बता रहे हैं. दरअसल बालाघाट का एक बड़ा इलाका नक्सल प्रभावित रहा, जहां पर विकास की गति धीमी थी. ऐसे में उन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर खराब होने की खबरें आती थीं लेकिन अब बालाघाट के कलेक्टर मृणाल मीना की पहल से स्कूलों की तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत कलेक्टर ने कई विकास कार्यों की स्वीकृति के आदेश जारी किए हैं. इसमें स्कूलों का जीर्णोद्धार भी शामिल है. जिले की जनपद पंचायत बिरसा के 10 और बैहर जनपद पंचायत के 10 जर्जर स्कूलों के भवनों के मरम्मत की मंजूरी मिली है. इसमें सभी स्कूलों के लिए लगभग एक लाख 25 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. मरम्मत कार्य की निगरानी सीईओ और एसडीएम स्तर से की जाएगी ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.
लोकल 18 ने किडंगीटोला के प्रधान पाठक से बातचीत की. उन्होंने बताया कि स्कूल पहले जर्जर थे. बारिश के दिनों में डर लगा रहता था कि छत गिर न जाए. वहीं बारिश में टपकती छतों के नीचे बाल्टी और बर्तन तक रखना पड़ता था. ज्यादा बारिश होने पर तो बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती थी. ऐसे में भीगी दीवारें, फर्श पर जमा पानी बच्चों ही नहीं बल्कि उनके पैरेंट्स को भी परेशान करता था. कई स्कूल ऐसे थे कि खिड़की-दरवाजे टूटे हुए रहते थे. गर्मियों में टिन की छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करना बेहद मुश्किल था. बैहर क्षेत्र में भी हालात कुछ अलग नहीं थे. प्लास्टर झड़ चुका था, दीवारों में गहरी दरारें थीं और कई जगह शौचालय और पेयजल की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं थी. शिक्षकों और अभिभावकों को हर दिन इस बात की चिंता रहती थी कि कहीं जर्जर भवन किसी हादसे का कारण न बन जाए.
कलेक्टर की पहल से बदलेगी स्कूलों की तस्वीर
कलेक्टर मृणाल मीना ने कहा कि मीडिया के माध्यम जर्जर स्कूलों की खबरें आती थीं. ऐसे में स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं. इसमें पहले जनजातीय कार्य विभाग और शिक्षा विभाग से इतर राजस्व विभाग ने स्कूलों का सर्वे किया. इस दौरान अति जर्जर स्कूलों का चयन कर स्कूलों में काम शुरू करवाया गया है. वहीं गुणवत्ता युक्त कार्य हों, इसके लिए निगरानी भी रखी जा रही है. बहरहाल स्कूलों की सुधरती दशा देख बच्चे कह रहे हैं- थैंक्यू कलेक्टर अंकल.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.