नर्मदापुरम जिले के बानापुरा रेंज की झाड़वीरा बीट में वन विभाग की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने प्लांटेशन की जमीन को उजाड़कर करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। अब वहां टपरिया (अस्थायी झोपड़ियां) बनाई जा रही हैं और जमीन को खेत में बदलने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग की बेशकीमती जमीन को बचाने और कब्जा रोकने में अधिकारी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। रेंजर स्तर के अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि जब भी कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाती है, अतिक्रमणकारी पुरुष महिलाओं को आगे कर देते हैं। इस कारण मौके पर सख्त कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। तीन साल से जारी है कब्जे का सिलसिला बताया जा रहा है कि यह कब्जा पिछले तीन साल से लगातार जारी है। वन विभाग ने इस दौरान 80 से अधिक पीओआर (Preliminary Offence Report – प्रथम प्रारंभिक रिपोर्ट) दर्ज किए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्लांटेशन की जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया जा सका है। चार साल पहले हुआ था प्लांटेशन बानापुरा रेंज की झाड़वीरा बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ 159 में करीब चार साल पहले पौधारोपण किया गया था। इस प्लांटेशन को ग्राम राजलदाना और पतलाई के कुछ निवासियों द्वारा उजाड़ दिया गया और जमीन पर कब्जा कर लिया गया। वर्तमान में अतिक्रमणकारी अलग-अलग स्थानों पर टपरिया बना रहे हैं, ताकि बाद में वहां खेती की जा सके। तीन साल में 80 से ज्यादा प्रकरण दर्ज बानापुरा रेंजर ज्ञान सिंह पवार ने बताया कि कक्ष क्रमांक 159 में किए गए प्लांटेशन को उजाड़कर अतिक्रमण किया जा रहा है। वर्ष 2023 में विभाग ने कार्रवाई करते हुए 69 पीओआर जारी किए थे और उस समय कब्जा रोक दिया गया था। इसके बाद लगभग दो साल तक स्थिति नियंत्रित रही। हालांकि पिछले एक महीने से फिर अतिक्रमण तेज हो गया है। डेढ़ महीने पहले 10 पीओआर दर्ज किए गए और सोमवार को भी एक नया प्रकरण दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर तीन साल में 80 से अधिक पीओआर बनाए जा चुके हैं। रेंजर ने अतिरिक्त बल की मांग की रेंजर के अनुसार, अतिक्रमणकारियों को कब्जा हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन जब टीम कार्रवाई के लिए पहुंचती है तो पुरुषों की जगह महिलाएं आगे आ जाती हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील हो जाती है और तत्काल कार्रवाई संभव नहीं हो पाती। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से अतिरिक्त बल की मांग भी की गई है, ताकि वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके। फिलहाल 20 हेक्टेयर प्लांटेशन क्षेत्र पर बढ़ता कब्जा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि विभाग कब तक इस वनभूमि को पूरी तरह अतिक्रमण से मुक्त करा पाता है।
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