निमाड़ अंचल के प्रसिद्ध लोक पर्व ‘भगोरिया’ की मंगलवार से शुरुआत हो गई है। आदिवासी समाज के इस पारंपरिक उत्सव का आगाज बड़वानी जिले की पाटी तहसील के पहाड़ी क्षेत्र रोसर गांव से हुआ। साल भर इस त्योहार का इंतजार करने वाले ग्रामीण, विशेषकर पलायन से लौटे लोग, बड़ी संख्या में अपनी संस्कृति के रंगों में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा और मांदल की गूंज रोसर के पहले भगोरिया हाट में आदिवासी संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां ढोल और मांदल की थाप पर जमकर थिरके। वनांचल से आए हजारों ग्रामीणों ने हाट में जमकर खरीदारी की और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की अग्रिम बधाई दी। बच्चों ने खिलौनों और झूलों का आनंद लिया, वहीं कई ग्रामीण परिवार के साथ व्यंजनों का लुत्फ उठाते और सेल्फी लेते दिखे। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल भी पहुंचे इस विशेष अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल भी ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने न केवल पर्व की बधाई दी, बल्कि खुद भी मांदल थामकर पारंपरिक नृत्य किया। उनके साथ जनपद अध्यक्ष थानसिंह सस्ते, मंडल अध्यक्ष संजय वर्मा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। होली तक चलेगा उत्सव का सिलसिला भगोरिया हाट का यह सिलसिला अब होलिका दहन तक अंचल के अलग-अलग गांवों और कस्बों में लगातार चलेगा। आदिवासियों के लिए यह हाट केवल बाजार नहीं, बल्कि आपसी मिलन और खुशियां मनाने का सबसे बड़ा जरिया है। प्रशासन ने भी मेलों और हाटों की सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। देखें तस्वीरें…
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