ग्वालियर में तीन दिवसीय ‘कृषि मंथन 2026’ का मंगलवार को समापन हो गया। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित इस मंथन में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश की कृषि के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना था। मंथन के दौरान एआई, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल कृषि, उच्च तकनीकी उद्यानिकी, बीज सुधार और बाजार व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन विमर्शों के आधार पर मध्यप्रदेश की कृषि के भविष्य के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने पर सहमति बनी। मंथन से प्राप्त सभी सुझावों को कार्ययोजना तैयार करने हेतु शासन को भेजा जाएगा। समापन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि का परिणाम है। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जिसने विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और किसानों को एक मंच पर लाया। कुलपति ने कृषि सचिव निशांत बरबड़े के मार्गदर्शन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशकों के सहयोग की भी सराहना की, जिससे इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप मिला। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उपमहानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर.सी. अग्रवाल ने कहा कि मंथन से निकले महत्वपूर्ण सुझावों को ठोस परियोजनाओं में बदलना आवश्यक है, ताकि कृषि अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिल सके। आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. वी.के. सिंह ने विभिन्न विचारों से सार्थक निष्कर्ष निकालने और उन्हें अमल में लाने पर जोर दिया। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने जलवायु अनुकूल किस्मों, फसल अवशेष प्रबंधन, एआई आधारित सटीक कृषि, एकीकृत टिकाऊ मॉडल, स्मार्ट कृषि यंत्रीकरण और आईओटी आधारित तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। गुणवत्तापूर्ण डेटा, ड्रोन निगरानी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। इसके अतिरिक्त, बीज सुधार, स्पीड ब्रीडिंग, नैनो उर्वरक, ई-नाम सशक्तिकरण, क्लस्टर आधारित उत्पादन और हाई-टेक उद्यानिकी मॉडल पर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। सोयाबीन क्षेत्र को मजबूत करने और जिला स्तर पर ब्रांडिंग विकसित करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
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