Last Updated:
Jabalpur ROB Collapsed: जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 बंद है. कारण इस पर बना 400 करोड़ का आरओबी ढह गया है. कुछ समय पहले इसकी एक लेन गिरी थी, अब दूसरी भी गिर गई. जांच के लिए दिल्ली से वैज्ञानिकों की टीम आई. फिर जो वजह सामने आई वो चौंकाने वाली है. जानें ग्राउंड रिपोर्ट…
Jabalpur News: जबलपुर-भोपाल NH-45 पर शहपुरा में बना रेलवे ओवरब्रिज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. हाल ही में इसका दूसरा हिस्सा गिर गया. इसके गिरने के बाद जबलपुर-भोपाल हाईवे बंद हो गया. दिल्ली तक हड़कंप मच गया. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने मामले में जांच शुरू कर दी है. करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से 56 km के इस मार्ग पर बना ये ब्रिज 4 साल भी नहीं चल पाया और भरभरा कर गिर गया.
सबसे खास बात ये कि पुल का पहला हिस्सा 6 महीने पहले ही गिर चुका था, जिसके चलते सिंगल लाइन में जबलपुर-भोपाल हाईवे पर वाहन दौड़ रहे थे. अब, दूसरा हिस्सा भी धाराशाई होने के बाद NH-45 पूरी तरह बंद हो गया. वाहनों को डायवर्ट कर दिया गया और सरकार ने एक्शन लेना शुरू कर दिया. वहीं दिल्ली से जबलपुर पहुंचे CRRI के साइंटिस्ट ने पुल को लेकर नया खुलासा किया है. देखें ग्राउंड जीरो से लोकल 18 की ये रिपोर्ट…
वाटर लेवल बना ब्रिज गिरने की मुख्य वजह
मध्य प्रदेश में पुल ध्वस्त होने के मामले में अब ग्राउंड प्रोफाइल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. लोकल 18 से बातचीत में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूशन (CRRI) के चीफ साइंटिस्ट डॉ. कंवर सिंह ने बताया कि ब्रिज के नीचे की जमीन की स्थिति असामान्य थी. ब्रिज के एक साइड में काफी मात्रा में पानी है, जबकि ऊपर के हिस्से में पानी कम है, यानी वाटर लेवल ऊपर-नीचे होने की वजह से जमीन की पकड़ कमजोर हो गई और पुल गिर गया.
काली मिट्टी का स्वभाव अलग
डॉ. सिंह के मुताबिक, यह पूरा मामला ग्राउंड की भौगोलिक स्थिति और सीजन पर भी निर्भर करता है. गर्मी और बरसात में पानी का स्तर अलग-अलग होता है, जिससे मिट्टी का व्यवहार बदल जाता है. खासकर ब्लैक कॉटन सॉइल (काली मिट्टी) का स्वभाव अलग होता है. उन्होंने बताया कि जब यह मिट्टी सूखी होती है तो लोहे की तरह सख्त हो जाती है, लेकिन जब इसमें नमी आ जाती है तो यह नरम होकर फैलने-सिकुड़ने लगती है. ब्रिज की साइड वॉल भी इसी मिट्टी पर बनी थी, जिससे ब्रिज के ये हालात बने.
ठेका कंपनी ब्लैकलिस्टेड
फिलहाल, पूरे मामले में लैबोरेट्री इन्वेस्टिगेशन, फील्ड इन्वेस्टिगेशन और सॉइल टेस्टिंग कराई जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही पुल गिरने की सटीक और तकनीकी वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी. दूसरी तरफ जबलपुर के शहपुरा थाने में सड़क निर्माण का ठेका लेने वाली राजस्थान की कंपनी बांगड़ इंफ्रा के विनोद जैन और मेसर्स आईसीटी प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के टीम लीडर हुकुम सिंह परमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है .
प्रतिनियुक्ति पर आए अफसरों की पेंशन रोकने का प्रस्ताव
ब्रिज गिरने के बाद मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भारत यादव ने प्रतिनियुक्ति पर आए आरपी सिंह तत्कालीन संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी जबलपुर और संतोष शर्मा तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक जबलपुर को ओवरब्रिज निर्माण की गुणवत्ता में घोर लापरवाही का जिम्मेदार माना है, जिनकी गलती से 50 साल के लिए बना पुल 4 साल में ही गिर गया. हालांकि, दोनों अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, इसलिए विभाग ने दोनों की पेंशन रोकने या वापस लेने की कार्रवाई प्रस्तावित कर प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर राज्यपाल से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. वहीं, तत्कालीन जबलपुर में सहायक महाप्रबंधक के पद में पदस्थ रहे भोपाल के आरएस चंदेल से 7 दिन में जवाब भी मांगा है.
About the Author
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें