Guna News: एक मां ने अपने बेटे को खो दिया. बाथरूम में बेटे की लटकती लाश देख वह सदमे में थी. मातम भी नहीं मना पाई थी कि पुलिस मां को ही बेटे का कातिल मान लिया. हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. निचली अदालत ने जेल भेज दिया. बदनसीब मां ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. आखिरकार सिस्टम को मां की बात माननी पड़ी. हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को खारिज किया. करीब एक साल बाद मां बाइज्जत बरी हुई. उसका दाग धुल गया.
बाथरूम में लटकी मिली लाश
ये कहानी मध्य प्रदेश के गुना शहर की है. पति के ट्रांसफर के चलते अलका और उनका 15 साल का बेटा अभ्युदय गुना में अकेले रह रहे थे. अलका की शादी 2006 में भोपाल में अनुपम जैन से हुई थी. 2011 में अभ्युदय का जन्म हुआ था. लेकिन, 14 फरवरी 2025 की सुबह वैलेंटाइन डे पर अलका ने घर के बाथरूम में बेटे को फंदे से लटका पाया. वह उसे लेकर अस्पताल भागीं, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. फिर तो अलका की जिंदगी जहन्नुम बनती गई.
मां को किया गिरफ्तार
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘गला घोंटना’ बताया गया. इस रिपोर्ट ने मामले को हत्या का रंग दे दिया. पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन जांच की दिशा जल्दी ही अलका की ओर मुड़ गई. 8 मार्च 2025 को अल्का को गिरफ्तार कर लिया गया. जेल की सलाखों के पीछे अलका ने महीनों गुजारे, जहां वह अपने बेटे की यादों में रोती रहतीं. आखिरकार, 16 जून 2025 को हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली, लेकिन दाग तो लग चुका था.
SIT ने आत्महत्या माना
अलका के पति अनुपम ने पुलिस हेडक्वार्टर्स में शिकायत की, जिसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनी. जांच में खुलासा हुआ कि अभ्युदय पढ़ाई के प्रेशर से डिप्रेशन में था. उसके मार्क्स लगातार गिर रहे थे और वह अकेलेपन से जूझ रहा था. एसआईटी ने पाया कि मां के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. आईजी, डीआईजी और एसपी की मंजूरी के बाद पुलिस ने कोर्ट में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की, जिसमें कहा गया कि यह आत्महत्या का मामला है.
गुना अदालत से अलका को बड़ा झटका
हालांकि, गुना के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस रिपोर्ट को ठुकरा दिया. 9 मई 2025 को, बिना किसी पुख्ता सबूत के सिर्फ शंकाओं के आधार पर उन्होंने अलका पर ट्रायल चलाने का आदेश दे दिया. यह फैसला अलका के लिए नया झटका था.
हाईकोर्ट ने बदला फैसला
इसके मामला हाईकोर्ट पहुंचा. 9 फरवरी 2026 को जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का आदेश ‘काल्पनिक धारणाओं’ पर आधारित था और इसमें कोई तर्क नहीं. हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के 9 मई 2025 के ऑर्डर को रद्द कर दिया और अलका के खिलाफ सभी क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स को हमेशा के लिए खत्म कर दिया.
निचली अदालत, पुलिस को कड़ी नसीहत
कोर्ट ने पुलिस और निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, कहा कि निर्दोष को परेशान करना न्याय का अपमान है. कोर्ट ने ये भी कहा कि मजिस्ट्रेट ने मेडिकल रिपोर्ट के उस हिस्से को इग्नोर कर दिया, जहां विशेषज्ञों ने कहा था कि आंखों में खून जमना फांसी या स्ट्रांगुलेशन दोनों में हो सकता है.