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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में विट्ठल भगवान का एक मंदिर 200 से ढाई साल पुराना है. यह मंदिर निमाड़ क्षेत्र का सबसे बड़ा विट्ठल मंदिर है. इस मंदिर में जो मूर्ति विराजमान है उस मूर्ति के सिर पर शिवलिंग बना हुआ है इसलिए लोग यहां पर सबसे अधिक दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचते हैं.
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कई प्राचीन मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे मौजूद हैं, जिनकी अपनी अपनी कहानी है. ऐसा ही एक मंदिर राजपुरा क्षेत्र में विट्ठल भगवान का है, इसके बारे में क्षेत्र के अजय बालापोरकर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह करीब 200 से ढाई साल पुराना मंदिर है इस प्रतिमा की स्थापना क्षेत्र के लोगों ने की है. पंढरपुर से प्रतिमा को सिर पर रख कर पैदल लाया गया था. यहां पर दहीहंडी से लेकर दो धार्मिक अनुष्ठान होते है. इस प्रतिमा की खासियत हैं कि विट्ठल भगवान के सिर पर शिवलिंग बना हुआ है, जो लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है और यहां पर लोग दूर-दूर से दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं. ग्यारस के दिन मंदिर में लोगों की भीड़ लगती है.
मूर्ति के ऊपर बना हुआ है शिवलिंग
लोकल 18 की टीम को मंदिर समिति के अजय बालापोरकर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मंदिर की खासियत है कि यह निमाड़ क्षेत्र का अपने आप में सबसे बड़ा विठ्ठल मंदिर है और इस मंदिर में जो मूर्ति विराजमान है. उस मूर्ति के सिर पर शिवलिंग बना हुआ है. इसलिए लोग यहां पर सबसे अधिक दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं और यहां पर साल में तीन बार बड़े आयोजन भी होते हैं. जहां पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और हर ग्यारस के दिन यहां पर लोगों की भीड़ देखने के लिए मिलती है. यह प्रतिमा पंढरपुर से लाई गई और यह पाषाण की प्रतिमा है, जो काले पत्थर से बनी हुई है.
भक्त की मन्नत पूरी होने पर विराजमान की गई थी प्रतिमा
क्षेत्र के लोग बताते हैं कि इस प्रतिमा की कहानी कुछ ऐसी भी बताई जाती है कि एक भक्त ने अपने यहां पर संतान होने के लिए भगवान विट्ठल रुक्मिणी से मन्नत मांगी थी. जब उन्हें संतान की प्राप्ति हुई तो मन्नत पूरी होने पर वह स्वयं पंढरपुर गए और उन्होंने अपने सिर पर रखकर पैदल 10 दिन का सफर करने के बाद इस प्रतिमा को यहां पर लाकर विराजमान किया था. आज भी यह प्रतिमा इस मंदिर में विराजमान है. समिति और क्षेत्र के लोगों ने मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू कर दिया है.