शादी के दिन दोस्त की पत्नी पर आया दिल: शारीरिक संबंध भी बनाए, 4 साल बाद दोस्त को पहले गोली मारी फिर खंडहर में जलाया – Madhya Pradesh News

शादी के दिन दोस्त की पत्नी पर आया दिल:  शारीरिक संबंध भी बनाए, 4 साल बाद दोस्त को पहले गोली मारी फिर खंडहर में जलाया – Madhya Pradesh News




मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा…11 नवंबर 2013 की रात, चुनावी ड्यूटी के दौरान पुलिस को बरखेड़ा पठानी इलाके के एक खंडहर से एक युवक की अधजली लाश मिलने की सूचना मिली। शव पर गोली के निशान थे। तलाशी लेने पर जेब से 5 हजार रुपए, एक सोने की अंगूठी और गैस एजेंसी की एक पर्ची मिली। उसी पर्ची के आधार पर मृतक की पहचान कारोबारी मनीष तख्तानी के रूप में हुई, जो दिलीप तख्तानी का बेटा था। जांच में सामने आया कि मनीष उस सुबह दुकान जाने के लिए घर से निकला था, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटा। उसकी कार कस्तूरबा नगर में लावारिस हालत में मिली। कार के अंदर खून के धब्बे थे और मनीष का मोबाइल भी वहीं पड़ा मिला। पुलिस को शक हुआ कि हत्या कार में ही की गई और पहचान छिपाने के लिए शव को खंडहर में ले जाकर जला दिया गया। दुकान में काम करने वाले नौकरों ने बताया कि शाम करीब 4 बजे मनीष के पास किसी का फोन आया था। इसके बाद वह दुकान से निकल गया, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटा। जांच आगे बढ़ी तो मनीष के दोस्त हर्षप्रीत सलूजा का नाम सामने आया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह मनीष की पत्नी सपना तख्तानी से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। यहीं से यह मामला एक खौफनाक मोड़ ले लेता है। अब पुलिस के सामने बड़ा सवाल था आखिरी बार मनीष को किसका फोन आया था? क्या दोस्त ने ही उसकी पत्नी को पाने के लिए हत्या की साजिश रची? या हत्यारा कोई और ही था। क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए आगे की कहानी… वारदात वाले दिन मनीष को आखिरी फोन किसका आया था? पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि वारदात वाले दिन मनीष को आखिरी फोन किसका आया था। जांचकर्ताओं को लगा कि यही कॉल इस हत्याकांड का सबसे अहम सुराग हो सकता है। इसी दिशा में पुलिस ने मनीष के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल्स निकलवाई। कॉल डिटेल्स की जांच में सामने आया कि मनीष को आखिरी कॉल उसके दोस्त हर्षप्रीत सलूजा के नंबर से आई थी। हालांकि, सिर्फ कॉल रिकॉर्ड के आधार पर यह साबित नहीं हो पा रहा था कि हर्षप्रीत का हत्या में कोई सीधा हाथ है। सपना एक महीने पहले बिना बताए घर छोड़कर चली गई थी पुलिस हर्षप्रीत से पूछताछ की तैयारी कर ही रही थी कि जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पता चला कि मृतक मनीष की पत्नी सपना घटना से करीब एक महीने पहले बिना बताए घर छोड़कर चली गई थी। उस समय मनीष ने पत्नी की गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन कुछ समय बाद सपना अपने आप घर लौट आई। इस पर पुलिस ने मामले को घरेलू विवाद मानते हुए गंभीरता से नहीं लिया और जांच को आगे नहीं बढ़ाया। मनीष की हत्या के बाद, पत्नी का अचानक गायब होना, दोस्त की आखिरी कॉल और पुराने घरेलू विवाद- इन सभी बातों ने पुलिस को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। अब जांच हर एंगल से आगे बढ़ाई जा रही थी। आक्रोश में सड़क पर उतरा सिंधी समुदाय पुलिस ने शक के आधार पर इलाके के कई बदमाशों को उठाकर पूछताछ की, लेकिन इसके बावजूद हत्या का कोई ठोस खुलासा नहीं हो सका। जब काफी समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला, तो व्यापारियों की नाराजगी बढ़ने लगी। हत्यारों का पता न चलने से इलाके में रोष का माहौल बन गया। सिंधी समुदाय आक्रोशित हो गया और मनीष के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सड़क पर उतर आया। हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को जल्द ही मामले का खुलासा करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद जाकर आक्रोशित लोग शांत हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई टीमें गठित कीं और हर एंगल से जांच शुरू की। इसी दौरान मनीष के चाचा ने पुलिस को बताया कि उन्हें हत्या के पीछे मनीष के दोस्त हर्षप्रीत का शक है। पुलिस को पहले से ही उस पर संदेह था। शक और संकेत मिलने के बाद पुलिस ने हर्षप्रीत को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया। अब जांच निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही थी। इनकार के बाद हर्षप्रीत ने जुर्म कबूल किया पूछताछ में हर्षप्रीत पहले मनीष की हत्या से इनकार करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ कि तो वह टूटने लगा। पुलिस ने हर्षप्रीत से पूछा कि हत्या वाले दिन उसने सपना से 2 बार और मनीष को फोन क्यों किया था? वह समझ गया कि उसके राज से पर्दा उठ चुका है। आखिरकार उसने मजबूर हो कर वारदात की पूरी कहानी बता दी। उस ने मनीष की हत्या की जो कहानी पुलिस के सामने बयां की, वह बहुत ही चौंकाने वाली निकली। दोस्त की पत्नी से थे शारीरिक संबंध
पूछताछ में सामने आया कि मनीष की पत्नी सपना और हर्षप्रीत के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। शादी के बाद हर्षप्रीत का घर आना-जाना बढ़ गया था। समय के साथ यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि हर्षप्रीत और सपना शादी करने का प्लान बनाने लगे, लेकिन मनीष उनके रास्ते में था। हत्या वाले दिन हर्षप्रीत ने मनीष को बहाने से चेतक ब्रिज बुलाया। वह मनीष की कार में पीछे की सीट पर बैठ कर बातें करने लगा। उसी दौरान हर्ष ने पहली गोली मनीष के सिर पर मारी। उस के बाद बाहर आ कर 2 गोलियां और मारीं। हर्षप्रीत ने सबूत मिटाने की कोशिश की मनीष की मौत हो गई तो हर्षप्रीत ने उसकी लाश को बगल वाली सीट पर इस तरह से बैठाया कि देखने में वह जीता जागता इंसान लगे। ऐसा हुआ भी चुनाव के दौरान चल रही वाहनों की भारी चेकिंग से बचने के लिए वह मनीष की लाश सहित कार को बरखेड़ा ले गया। लाश को ठिकाने लगाने के बाद वह फिर चेतक ब्रिज पर आ गया। रास्ते से फोन कर उसने अपने नौकर अमीन को पानी लेकर बुलाया और खून के धब्बे धोए। कार में चाबी उस ने इस उम्मीद के साथ लगी छोड़ दी थी कि किसी और की नजर इस पर पड़ जाए और वह कार चुरा ले जाए ताकि मामला उलझ जाए। सपना की कॉल डिटेल ने हैरान किया पुलिस ने सपना के मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकाली। रिकॉर्ड देखकर जांच टीम हैरान रह गई। हत्या वाले दिन सपना और हर्षप्रीत के बीच कई बार कॉल और मैसेज हुए थे। एक मैसेज में लिखा था ‘काम होते ही मुझे कॉल करना’ यह मैसेज पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बन गया। अब शक सीधे पत्नी पर भी था। सपना अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती थी और पहले भी घर से भाग चुकी थी। हर्षप्रीत सुसाइड की धमकी देता था, इसलिए सपना भी बीच में फंस चुकी थी। इसलिए दोनों ने तय किया कि मनीष को रास्ते से हटाना पड़ेगा। हर्षप्रीत ने अपने एक दोस्त आमिर उर्फ अमीन को भी इस साजिश में शामिल किया। आमिर, मनीष की दुकान पर काम करता था, इसलिए उसे मनीष की दिनचर्या और आदतों की पूरी जानकारी थी। सपना को न पछतावा था और न ही माथे पर शिकन
घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, लेकिन पुलिस के पास कॉल डिटेल रिकॉर्ड मोबाइल लोकेशन कार से मिले खून के निशान पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे अहम सबूत आरोपियों के खिलाफ था। मामला भोपाल जिला अदालत में चला। सजा सुनाने से पहले आरोपियों ने अदालत से नरमी की गुहार लगाई सपना ने कहा कि वह महिला है और उसकी छोटी बेटी है। भोपाल जिला न्यायालय ने गुहार खारिज कर दी और 11 अगस्त 2016 को सपना तख्तानी हर्षप्रीत सलूजा आमिर उर्फ अमीन को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। फैसले के बाद एक बात जिसने सबको चौंकाया सपना के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। न पछतावा, न घबराहट। जेल ले जाते समय वह अपने परिजनों से सामान्य बातचीत करती रही।



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