MP के एकांश छत्तीसगढ़ में बने सिविल जज, पहले अटेम्प्ट में हासिल की 5वीं रैंक

MP के एकांश छत्तीसगढ़ में बने सिविल जज, पहले अटेम्प्ट में हासिल की 5वीं रैंक


Shivpuri News: शिवपुरी के 26 र्षीय होनहार युवा एकांश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ सिविल जज परीक्षा में 5वीं रैंक हासिल कर जिले का ही नहीं, मध्य प्रदेश का नाम भी रोशन किया है. पहले ही प्रयास में मिली इस उपलब्धि ने पूरे परिवार को गौरवान्वित कर दिया है. एकांश व्यवसायी एवं समाजसेवी संदीप-तरुणा अग्रवाल के पुत्र हैं. परिवार का पुश्तैनी व्यवसाय होने के कारण सबको उम्मीद थी कि एकांश भी व्यापार संभालेंगे.

इसी वजह से दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम के बाद पिता ने उन्हें एमबीए कर व्यापार को आगे बढ़ाने की सलाह दी. एकांश ने एमबीए में प्रवेश भी लिया, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा. बीकॉम के दौरान सिविल लॉ और क्रिमिनल लॉ जैसे विषयों में उनकी विशेष रुचि विकसित हो चुकी थी. यही रुचि आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने वाली बनी.

प्री के समय बदल गए नियम
एकांश ने एलएलबी में प्रवेश लिया और सिविल जज की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार सिविल जज परीक्षा का प्री एग्जाम दिया, उसी दौरान नियमों में बदलाव कर 3 वर्ष की प्रैक्टिस और 70 प्रतिशत अंक अनिवार्य कर दिए गए. यह बदलाव उनके लिए चुनौती था, लेकिन उन्होंने इसे प्रेरणा बना लिया. उन्होंने ठान लिया कि अब वे पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देंगे और सफलता हासिल करेंगे.

एलएलएल भी कर लिया
एकांश ने एलएलबी के साथ-साथ तैयारी जारी रखी. बाद में एलएलएम भी उत्कृष्ट अंकों से पास किया. सितंबर 2025 में उन्होंने प्री परीक्षा दी, दिसंबर में मेन परीक्षा दी और 18 फरवरी 2026 को साक्षात्कार हुआ. 20 फरवरी की रात 10:30 बजे परिणाम घोषित हुआ, जिसमें एकांश ने पूरे राज्य में पांचवीं रैंक प्राप्त की थी. बता दें कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) के कुल 57 पदों पर भर्ती के लिए यह परीक्षा हुई थी.

प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास
एकांश ने बताया, उनके माता-पिता भारत विकास परिषद से जुड़े हैं. परिषद द्वारा आयोजित ‘भारत को जानो’ और क्विज प्रतियोगिताओं में भाग लेने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा. वे बचपन से ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे, जिससे मंच पर बोलने और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की आदत बनी. साक्षात्कार के दौरान जूरी ने उनसे ‘वंदे मातरम’ गाने को कहा. परिषद के कार्यक्रमों में नियमित रूप से यह गीत गाया जाता रहा है, इसलिए उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से गीत प्रस्तुत किया. लगभग 22 मिनट चले इंटरव्यू में उनसे जनरल नॉलेज, कानून और समसामयिक विषयों से जुड़े सवाल पूछे गए. उन्होंने बिना घबराए सभी प्रश्नों का जवाब दिया, जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा.

ऑनलाइन तैयारी रही सहायक
कोरोना काल के कारण उनकी कोचिंग और पढ़ाई का अधिकांश हिस्सा ऑनलाइन रहा. उन्होंने मेन्स की कोचिंग रायपुर से ऑनलाइन माध्यम से की. करंट अफेयर्स और सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट के निर्णयों के लिए वे नियमित रूप से Live Law वेबसाइट का अध्ययन करते थे. वे रोज कम से कम आधा घंटा नवीनतम फैसले पढ़ते थे. उनका मानना है कि ऑनलाइन माध्यम से समय की बचत होती है और ताजा जानकारी उपलब्ध हो जाती है.

युवाओं को सफलता के मंत्र
एकांश ने सिविल जज की तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह दी कि वे सबसे पहले अपने बेसिक्स मजबूत करें. बेयर एक्ट्स को 3-4 बार पढ़ें. महत्वपूर्ण सेक्शन नंबर याद रखें. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के ताजा फैसलों को नियमित पढ़ें. ऑब्जेक्टिव प्रश्नों को समय सीमा में हल करने का अभ्यास करें. साथ ही, प्रतियोगिताओं में भाग लेकर आत्मविश्वास विकसित करें. एकांश की सफलता पर परिवार में जश्न का माहौल है. मां ने आरती उतारी और पिता ने मिठाई खिलाकर खुशी जताई. उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शहर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.



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