गुरुवार को ग्वालियर नगर निगम परिषद के विशेष सम्मेलन में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन का माहौल गर्मा गया, जिसके बाद बैठक को 2 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बैठक के दौरान, कांग्रेस पार्षदों ने केंद्र की भाजपा सरकार पर सार्वजनिक संस्थानों को बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार विभिन्न सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की दिशा में तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम जनता प्रभावित हो रही है। इस बयान पर भाजपा पार्षदों ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की। भाजपा पार्षद दल के नेता हरिपाल ने कांग्रेस पार्षदों से आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में बिना प्रमाण के ऐसे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस छिड़ गई, जिससे बैठक की कार्यवाही बाधित हुई और हंगामा बढ़ गया। स्थिति बिगड़ती देख सभापति मनोज तोमर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और सदन के नियमों का पालन करने की अपील की। उनके समझाने के बाद माहौल कुछ हद तक शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। इसके बाद, भाजपा पार्षदों ने एक और मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बैठक के एजेंडों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है। पार्षदों का तर्क था कि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा और पुनर्विचार आवश्यक है। इसलिए, उन्होंने बैठक को स्थगित कर किसी अन्य तिथि पर बुलाने की मांग की, ताकि सभी पार्षद पूरी तैयारी के साथ चर्चा में भाग ले सकें। सभापति मनोज तोमर ने सभी पार्षदों से राय लेने के बाद सर्वसम्मति से बैठक को 2 मार्च तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस दौरान लंबित मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
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