राजगढ़ जिला मुख्यालय पर पुलिस विभाग के जर्जर क्वार्टरों में जुआ संचालित होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। गुरुवार को प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की टीम जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू करते हुए दो खाली क्वार्टरों को जमींदोज कर दिया। जिस क्वार्टर में जुआ संचालित किया जा रहा था, उसे फिलहाल नहीं तोड़ा गया है और उसमें रखा सामान हटाने के लिए दो दिन की मोहलत दी गई है। इसके अलावा नौ अन्य क्वार्टरों को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। जुआ पकड़ाए जाने के बाद शुरू हुई कार्रवाई
बुधवार को कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पुराना महल स्थित पानी की टंकी के पास बने पुलिस विभाग के जर्जर क्वार्टरों में दबिश दी थी। यहां लंबे समय से जुआ गतिविधि संचालित होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने मौके से 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर 4 लाख 74 हजार 400 रुपए नकद और अन्य सामग्री जब्त की थी। पुलिस विभाग की संपत्ति में अवैध गतिविधि सामने आने के बाद प्रशासन पर सवाल उठे, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। 12 क्वार्टर चिन्हित, दो तोड़े गए
गुरुवार को एसडीएम निधि भारद्वाज के निर्देशन में पीडब्ल्यूडी की टीम मौके पर पहुंची। यहां कुल 12 क्वार्टर चिन्हित किए गए, जिनमें से दो पूरी तरह खाली पाए गए और उन्हें जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। बाकी 10 क्वार्टरों में कहीं लोग रह रहे थे तो कहीं सामान रखा हुआ था। संबंधित लोगों को दो दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद शेष जर्जर भवनों को भी तोड़ा जाएगा। डेढ़ साल पहले घोषित हुए थे ‘डेड’
इन क्वार्टरों को लोक निर्माण विभाग ने करीब डेढ़ साल पहले ही जर्जर और अनुपयोगी घोषित कर दिया था। विभागीय रिकॉर्ड में ‘डेड’ घोषित होने के बावजूद इन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप खाली और असुरक्षित भवनों पर कब्जा हो गया और कुछ स्थानों पर अवैध गतिविधियां शुरू हो गईं। जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण सरकारी संपत्ति असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गई। एसडीएम निधि भारद्वाज ने बताया कि चिन्हित जर्जर क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। वहीं पीडब्ल्यूडी के एसडीओ एन. धनवाल ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद सभी डेड घोषित क्वार्टरों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। पुलिस विभाग के जर्जर क्वार्टर में जुआ संचालित होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी संपत्तियों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे असुरक्षित भवनों का दुरुपयोग नहीं हो सकेगा।
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