‘पैसे अचानक बंद हुए’, लाडली योजना से नाम कटा; बढ़ी चिंता, बहनों ने सुनाया दर्द

‘पैसे अचानक बंद हुए’, लाडली योजना से नाम कटा; बढ़ी चिंता, बहनों ने सुनाया दर्द


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लाडली बहना योजना में अभी नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं. इसके अलावा 60 साल की उम्र होने के बाद महिलाओं के इस योजना से भी नाम काटे जा रहे हैं. अब लाडली बहना योजना को लेकर कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने बीजेपी पर निशाना साधा है और महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने उसका जवाब दिया है.

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लाडली बहना योजना से कटे महिलाओं के नाम

मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना के दम पर ही बीजेपी सरकार साल 2023 में भारी भरकम बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी, लेकिन अब बहुचर्चित इस योजना को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस ने भाजपा पर जहां पलटवार किया है, तो बीजेपी ने भी उसका करारा जवाब दिया है. सितंबर 2023 में जहां प्रदेश में 131.07 लाख लाडली बहनें योजना का लाभ ले रही थीं. वहीं, जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर 124.78 लाख रह गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं कि लगातार इस योजना से महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं. वहीं सरकार के पास नए नाम जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

60 साल की उम्र होते ही लाडली बहना योजना से कट जाता है महिलाओं का नाम
मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना का लाभ 60 साल की उम्र तक की महिलाओं को दिया जाता है. अब बड़ी विडंबना यह है कि जैसे ही इस योजना की पात्र महिलाएं 60 साल की होती हैं. सिस्टम अपने आप लाभार्थी का नाम हटा देता है. इसके बाद यह महिला वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले सकती हैं, लेकिन मौजूदा समय में लाडली बहनों को ₹1500 की राशि दी जा रही है और पेंशन के तहत मात्र ₹600 मिलते हैं. ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने कम पैसे में अपना गुजारा करने की होती है. देखा जाए तो 60 वर्ष की उम्र होते ही सीधे ₹900 प्रति माह की राशि में कटौती हो जाती है.

लाडली बहन योजना का लाभ नहीं ले पा रही बहनों के बीच जब न्यूज 18 की टीम पहुंची, तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कई महीने से उनका नाम कटा हुआ है लाडली बहन योजना के पैसे नहीं मिल रहे हैं. वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिल रही है और कई महिलाओं के घर में दिव्यांग बच्चे हैं उनके पास भी कोई सहायता राशि नहीं आ रही है.

कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने साधा निशाना
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त 2023 के बाद कोई नया पंजीयन नहीं किया गया है और वर्तमान में नए पंजीयन शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. राशि बढ़ाने को लेकर भी कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने बहनों से जो वादा किया था वो नहीं निभा रही है. न तो 3 हजार दे रहे हैं और न नए नाम जोड़ रहे हैं.

भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कही ये बात
लाडली बहन योजना को लेकर जारी सियासत और महिलाओं के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कहा कि योजना की शर्तों के अनुसार सभी बहनों को लाभ दिया जा रहा है. हमारी सरकार सबका ध्यान रखती है. आंकड़ों के अनुसार योजना की शुरुआत में पंजीकृत महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 थी, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है. सरकार का कहना है कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर कई महिलाओं के नाम सूची से हटे हैं, जिसके कारण संख्या में कमी आई है.

विधानसभा में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों की आयु वर्ग अनुसार स्थिति भी सामने आई है. 55 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 7.89 लाख, 35 से 55 वर्ष में 71.63 लाख, 23 से 35 वर्ष में 45.26 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं. इधर, 25,395 महिलाओं का भुगतान समग्र आईडी डिलीट होने के कारण फिलहाल बंद है. सरकार का कहना है कि समग्र आईडी पुनः सक्रिय होने पर भुगतान फिर से शुरू किया जाएगा.

विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला. कांग्रेस ने नए पंजीयन शुरू करने और पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने की मांग की. विपक्ष का आरोप है कि जब नए पंजीयन नहीं हो रहे, तो कुछ जिलों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के दावे कैसे किए जा रहे हैं. लाडली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है. ऐसे में लाभार्थियों की घटती संख्या और भुगतान अटकने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है.



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