बारिश में टपकती छत, चूहों से छलनी फर्श, ये है विकसित एमपी की हकीकत! देखें ग्राउंड रिपोर्ट

बारिश में टपकती छत, चूहों से छलनी फर्श, ये है विकसित एमपी की हकीकत! देखें ग्राउंड रिपोर्ट


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Balaghat Anganwadi Ground Report: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में आंगनवाड़ी भवनों की जर्जर हालत ने सरकार के विकसित प्रदेश के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिले की 2560 आंगनवाड़ियों में से 237 भवन क्षतिग्रस्त हैं और 275 किराए के मकानों में संचालित हो रही हैं. कई जगह बारिश में छत टपकती है और बच्चों को दूसरे घरों में शिफ्ट करना पड़ता है. परसवाड़ा और किरनापुर क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है. महिला एवं बाल विकास विभाग ने बजट मिलने के बाद सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन फिलहाल बच्चों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है.

MP Anganwadi Condition: जब बच्चा पहली बार पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलता है तो उसकी पहली संस्था आंगनवाड़ी होती है. यहां बच्चों को पोषण आहार, खेल, प्रारंभिक शिक्षा और मानसिक विकास की गतिविधियां मिलती हैं. लेकिन मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की कई आंगनवाड़ियों की हालत देखकर सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में प्रदेश सरकार ने बजट में ‘विकसित मध्यप्रदेश’ का विजन पेश किया, लेकिन जमीनी सच्चाई अलग तस्वीर दिखा रही है. कई केंद्र जर्जर हालत में हैं और कई किराए के मकानों में चल रहे हैं.

बारिश में टपकती छत, गीली फर्श
कन्हारटोला गांव की आंगनवाड़ी बारिश में सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. छत टपकती है, फर्श गीली रहती है और बच्चों को पास के घर में शिफ्ट करना पड़ता है. भवन बने अभी 20 साल भी पूरे नहीं हुए, लेकिन हालत खराब हो चुकी है. सूखे दिनों में भी प्लास्टर गिरने का खतरा बना रहता है.

चूहों से छलनी फर्श
चालीसबोड़ी में आंगनवाड़ी की फर्श पर चूहों ने गड्ढे कर दिए हैं. छत में सीपेज है और बाहर से भवन बेहद जर्जर नजर आता है. बच्चों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

किराए के भवन में चल रही पढ़ाई
मगरदर्रा गांव में आंगनवाड़ी किराए के मकान में संचालित हो रही है. बारिश के समय हालात इतने खराब हो गए थे कि बच्चों को एक घर के बरामदे में शिफ्ट करना पड़ा. कार्यकर्ता का कहना है कि अधिकारियों को सूचना दी गई है, लेकिन अब तक सुधार कार्य शुरू नहीं हुए.

आंकड़े चौंकाने वाले
बालाघाट जिले में कुल 2560 आंगनवाड़ी केंद्र हैं. इनमें से 237 जर्जर या क्षतिग्रस्त हैं और 275 किराए के भवन में चल रहे हैं. परसवाड़ा और किरनापुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा खराब स्थिति है. महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला परियोजना अधिकारी दीपमाला सोलंकी के अनुसार, जानकारी शासन को भेजी गई है और बजट मिलने पर सुधार कार्य किए जाएंगे.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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