बालाघाट से केदरनाथ 2 दोस्तों की दंडवत यात्रा, 1500 km के सफर में लगने वाला समय चौंका देगा

बालाघाट से केदरनाथ 2 दोस्तों की दंडवत यात्रा, 1500 km के सफर में लगने वाला समय चौंका देगा


Balaghat News: कहते हैं भक्ति में शक्ति होती है. बालाघाट के दो युवाओं ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. इनकी उम्र तो महज 22 साल है, लेकिन जज्बा चट्‌टानों जैसा मजबूत. बालाघाट से केदारनाथ की दूरी करीब 1500 km है. इन दोनों युवाओं ने भगवान शिव की भक्ति में यात्रा शुरू की है. इसमें से एक लगातार दंडवत करते हुए तो दूसरा साथी पदयात्रा करते हुए केदारनाथ तक जाएगा. दोनों की यात्रा महाशिवरात्रि के मौके पर शुरू हो चुकी है. पहले तो ये सबको नामुमकिन लग रहा था, लेकिन उनके हौसले को देख सब उनको स्वागत करते लगे. लोकल 18 ने दोनों युवाओं से मुलाकात की और उनकी यात्रा के बारे में जाना.

एक दिन में 2 km का सफर
बालाघाट से केदारनाथ के लिए बिरसा के निर्मल उइके और तुलेंद्र मड़ावी इस यात्रा पर निकल पड़े हैं. यह यात्रा आसान नहीं है, बल्कि इतनी कठिन है कि कल्पना करने मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं. दरअसल, इस यात्रा में वह साइकिल या फिर किसी वाहन से नहीं जा रहे, बल्कि निर्मल इसमें लगातार दंडवत करते हुए बढ़ रहे हैं ताे वहीं तुलेंद्र अपने दोस्त का साथ देते हुए पदयात्रा पर निकल पड़े हैं. ऐसे में एक दिन में महज दो से ढाई km ही चल पाते हैं. अब दोनों ने यात्रा को 10 दिन के बाद 25 किलोमीटर तक पूरी की है. मंजिल दूर है, लेकिन दोनों के हौंसले बुलंद.

नौकरी कर पहले पैसे जुटाए
निर्मल और तुलेंद्र कॉलेज से ही दोस्त हैं. यह यात्रा का विचार तो आया, लेकिन शुरू करना कठिन था. ऐसे में लंबे समय तक परिजनों को मनाना मुश्किल था. लेकिन, समय के साथ परिजनों को इनकी जिद के आगे झुकना पड़ा. फिर किसी पर आर्थिक बोझ न बने, इसके लिए दोनों ने लंबे समय तक प्राइवेट नौकरी की और यात्रा के लिए पैसे जुटाए. आखिरकार 15 फरवरी को बालाघाट के प्रसिद्ध शिव मंदिर शंकर घाट से यात्रा शुरू कर दी.

इस तरह कर रहे यात्रा
दोनों हर रोज सुबह 7 से 8 बजे तक यात्रा शुरू करते हैं. फिर दोपहर 12 बजे तक निर्मल दंडवत चलते हैं. वहीं, तूलेंद्र उनके पीछे साइकिल से चलते हैं. फिर दोपहर में खाना खाने के बाद आराम करते हैं. वहीं, फिर यात्रा का दूसरा फेज ढलते सूरज के साथ करते हैं. फिर शाम होते ही दोनों किसी मंदिर में रात बिताते हैं.

लोगों का मिल रहा भरपूर सहयोग
इस यात्रा को शुरू करते वक्त दोनों को अंदाजा नहीं था कि लोगों का सहयोग मिलेगा या नहीं मिलेगा. लेकिन, जब हौसले बुलंद हों तो काफिला बनते जाता है. ऐसे में 25 किलोमीटर की यात्रा में लोग लगातार मिलते गए. लोग उन्हें फल देते हैं. कोई सहयोग राशि देता है. वहीं, हर गांव में लोग उनके रहने और खाने की व्यवस्था करते हैं.

यात्रा शुरू करने का कारण0
निर्मल ने बताया, उन्होंने यह यात्रा गौरक्षा के लिए शुरू की है. साथ ही बुजुर्गों, महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जागरूकता लाने के लिए किया है. प्रकृति की रक्षा हो इसके लिए वह लोगों को जागरूक करना चाहते हैं. साथ ही वह चाहते हैं कि युवा सही रास्ते पर चलें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं.

कितने दिनों में पूरी होगी यात्रा?
तुलेंद्र और निर्मल का मानना है कि यात्रा को करीब 1 से डेढ़ साल तक समय लग सकता है. वहीं, अब भीषण गर्मी रहेगी तो चाल धीमी हो सकती है. इसके बारिश भी झेलनी पड़ेगी. ऐसे में समय यात्रा कठिन होने वाली है. लेकिन, लोगों का सहयोग मिल रहा है तो हौसला बंधा है. उन्हें यकीन है कि यात्रा जरूर पूरी होगी.



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