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Hanota Parikshit Dam Project: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जो तीसरा बजट पेश किया गया, उसमें इस बांध के लिए राशि का प्रावधान है. हनोता परीक्षित बांध परियोजना के लिए कुल 7 करोड़ 70 लाख के बजट का आवंटन किया गया है. इसमें 4 करोड़ 31 लाख की राशि से भू अर्जन का कार्य किया जाएगा. 3 करोड़ 18 लाख की लागत से बांध का निर्माण किया जाएगा.
Sagar News: सागर जिले में छोटे बड़े बांधों का निर्माण करके अधिक से अधिक क्षेत्र को सिंचित बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान इससे लाभान्वित होकर रबी सीजन में भी फसलों से अच्छी पैदावार ले सकें. एक के बाद एक डैम बनाने की स्वीकृति मिलती जा रही है. इसका आने वाले सालों में किसानों को फायदा भी मिलने लगेगा. ऐसे ही नरयावली विधानसभा में आने वाले हनोता परीक्षित बांध परियोजना को लंबे समय के बाद न सिर्फ स्वीकृति मिली, बल्कि बजट का भी आवंटन कर दिया गया है.
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जो तीसरा बजट पेश किया गया, उसमें इस बांध के लिए राशि का प्रावधान है. हनोता परीक्षित बांध परियोजना के लिए कुल 7 करोड़ 70 लाख के बजट का आवंटन किया गया है. इसमें 4 करोड़ 31 लाख की राशि से भू अर्जन का कार्य किया जाएगा. 3 करोड़ 18 लाख की लागत से बांध का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना के पूरे होने के बाद न सिर्फ खेतों की प्यास बुझेगी, बल्कि किसान भी आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे, जिससे गांव की दिशा और दशा भी सुधरेगी.
रबी, जायद सीजन में भी होगी कमाई
करीब 8 करोड़ की लागत से किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा और बांध का निर्माण होगा. फिर यहां जल भरा होने से 550 एकड़ भूमि सिंचित होने लगेगी. इस बांध के बनने की वजह से न केवल रबी सीजन बल्कि जायद के मौसम में भी फसल ले सकेंगे. किसान अभी केवल खरीफ की फसल पर निर्भर रहते हैं. तब रबी और जायद भी आसानी से कर सकेंगे, जिसका सीधा फायदा किसानों को आत्मनिर्भर बनने और अपनी आमदनी दोगुनी करने में मिलेगा.
बांध बनने से ये भी फायदे
कहीं पर भी इस तरह के बांध बनने से वह केवल सिंचाई तक ही सीमित नहीं रहते हैं, बल्कि इसकी वजह से आसपास के क्षेत्र का वाटर लेवल भी बढ़ने लगता है. वाटर लेवल ऊपर आने से कुआं, हैंडपंप, छोटा तालाब, डाबरी में भी पानी 12 महीने मिलने की स्थिति बन जाती है. खासतौर पर गर्मी के मौसम में जो जल संकट की स्थिति बनती है, उससे बड़ी राहत रहेगी. ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को जल संकट की चिंता नहीं रहेगी. आराम से पशुपालन कर सकेंगे. जल संग्रहण से क्षेत्र की शुष्कता कम होगी और हरियाली के विस्तार में मदद मिलेगी. इस परियोजना से क्षेत्र में समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे. विभाग द्वारा अब शीघ्र ही निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी, जिससे धरातल पर निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा.
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