बैतूल जिले के 18 मजदूरों को महाराष्ट्र के सोलापुर से तीन महीने बाद मुक्त कराया गया है। एजेंट और ठेकेदारों द्वारा इन मजदूरों को मजदूरी का झांसा देकर सोलापुर ले जाया गया था, जहां उनसे जबरन गन्ना कटाई का काम कराया जा रहा था। ये मजदूर बैतूल के भीमपुर विकासखंड के ग्राम धुंधरी और हरदा जिले के दिदमंदा गांव के निवासी हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पानमंगुर गांव में बंधक बनाकर रखा गया था। मजदूरों के अनुसार, उनसे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था। विरोध करने या आराम करने पर उन्हें गालियां दी जाती थीं और मारपीट की जाती थी। शौच के लिए जाने पर भी निगरानी रखी जाती थी और देरी होने पर पिटाई की जाती थी। उन्हें मोबाइल फोन पर बात करने की भी अनुमति नहीं थी। एजेंट और ठेकेदार ने पैसे हड़प लिए मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कोई मजदूरी नहीं दी गई। एजेंट और ठेकेदार ने उनके पैसे हड़प लिए। एक एजेंट ने 4 लाख रुपये लेकर भुगतान का वादा किया था, लेकिन एक भी रुपया नहीं दिया गया। किसी तरह मजदूरों ने जानसाहस संस्था के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मदद मांगी। सूचना मिलने पर संस्था की टीम बैतूल से सोलापुर पहुंची और स्थानीय प्रशासन की सहायता से सभी मजदूरों को मुक्त कराया। बैतूल कलेक्टर ने सोलापुर कलेक्टर से समन्वय स्थापित कर मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की। बैतूल लौटने के बाद मजदूरों ने कलेक्टर को एक आवेदन सौंपा है। उन्होंने एजेंट और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मजदूरों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका बकाया मेहनताना दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से भविष्य में कोई भी ठेकेदार मजदूरों के साथ ऐसी धोखाधड़ी या शोषण नहीं कर पाएगा।
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