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Sagar News: महंगी किताबें का बोझ कम करने स्कूलों में बुक एक्सचेंज प्रोग्राम चलाया जाएगा. इस साल स्कूलों की फीस भी नहीं बढ़ाई जाएगी, स्कूलों में किताब मेला लगेगा. किताबें दान करने वाले बच्चों का सम्मान होगा
Book Exchange Program: नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले सागर में एक सराहनीय पहल की जाएगी. जो कक्षा एक से लेकर 12 वी तक के हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत देगा. कलेक्टर ने जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में बुक एक्सचेंज प्रोग्राम चलाने के निर्देश दिए हैं. जिसमें स्कूल के वरिष्ठ छात्र अपनी पुरानी किताबें जूनियर छात्रों को दे सकेंगे. ऐसा होने से दो तरह से सीधा फायदा है एक तो अभिभावकों का बोझ कम हो जाएगा, खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए यह किसी संजीवनी की तरह काम करेगा. और दूसरा कागज की बचत होने से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह बड़ा कदम साबित हो सकता है. और इसके साथ जो सक्षम स्टूडेंट अपनी किताबें किसी दूसरे विद्यार्थी के लिए दान करेगा उसके लिए स्कूल की तरफ से अप्रिशिएट करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया जाएगा.
इसके साथ ही जो बच्चे किताबों से वंचित रह जाएंगे. उनके लिए अलग से हर स्कूल में पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जाएगा और जब स्कूलों में इस तरह के आयोजन होंगे तो उसकी जानकारी मय फोटो के शिक्षा विभाग को भी देनी होगी. कुछ स्कूलों में पहुंचकर शिक्षा विभाग की टीम भी निरीक्षण करेगी.
इस साल फीस नहीं बढ़ाई जाएगी
दरअसल पिछले कुछ सालों से निरंतर अभिभावकों के द्वारा इस तरह की शिकायत की जा रही है की प्राइवेट स्कूलों के द्वारा यूनिफॉर्म से लेकर किताबें और स्टेशनरी तक के समान को एक ही दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, स्कूल का ऐसा रवैया होने से स्टेशनरी संचालकों की मनमानी भी सामने आती है और महंगी किताबें का बोझ अभिभावकों को उठाना पड़ता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर संदीप जीआर के द्वारा प्राइवेट स्कूलों के संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, अपर कलेक्टर, एसडीएम जैसे सक्षम अधिकारियों के साथ बैठकर इस पर गहन चर्चा की गई और फिर बुक एक्सचेंज प्रोग्राम चलाने के निर्देश दिए. इसके साथ नए सत्र में निजी स्कूलों की फीस में बढ़ोतरी नहीं करने पर स्कूल संचालकों ने सहमति दी.
एक दूसरे को किताबें देंगे
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया की किताबें महंगी होती हैं लेकिन कुछ गार्जियन इनका खर्च वहन नहीं कर पाते, ऐसे में एग्जाम होने और रिजल्ट आने के बाद जैसे ही बच्चे स्कूल आते हैं तो वह पूर्व छात्रों से जैसे छठवीं के बच्चे को सातवीं के विद्यार्थी सातवीं के विद्यार्थी को आठवीं के स्टूडेंट अपनी किताब देंगे और जिनकी स्थिति दयनीय है उनको जो बच्चे किताब दान करेंगे उन्हें सम्मानित करेंगे.
शिक्षा का व्यवसायीकरण रुके
डीईओ अरविंद जैन ने बताया कि बैठक के दौरान कलेक्टर संदीप जी आर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य स्कूल संचालकों के साथ बातचीत कर एक ऐसा वातावरण बनाना है जहाँ शिक्षा का व्यवसायीकरण रुके. हम शिक्षा को सुलभ और विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें