रायसेन जिले में सैकड़ों अवैध ईंट-भट्ठे खुलेआम संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि अकेले रायसेन तहसील में ही 200 से अधिक ईंट-भट्ठे बिना वैध अनुमति के चल रहे हैं। इन भट्ठों के कारण पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां बनाने वाले कुम्हार और प्रजापति समाज के लोगों को पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है। नदियों और वन भूमि से हो रहा अवैध खनन ये भट्ठे नदियों, तालाबों और छोटे नालों के आसपास की राजस्व और वन भूमि से बेधड़क मिट्टी निकाल रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और राजस्व व वन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। समाज के नाम का दुरुपयोग का आरोप नियमों के अनुसार ईंट-भट्ठा संचालन की अनुमति मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और प्रजापति समाज के लोगों को दी जाती है। प्रजापति समाज के पदाधिकारियों का आरोप है कि उनके नाम का इस्तेमाल कर प्रभावशाली लोग अवैध कारोबार चला रहे हैं। प्रजापति समाज के अध्यक्ष लखन चक्रवर्ती ने बताया कि हालात ऐसे हो गए हैं कि कुम्हारों को मटके और मूर्तियां बनाने के लिए भी मिट्टी नहीं मिल रही है। इससे उनका पारंपरिक रोजगार प्रभावित हो रहा है। इन इलाकों में चल रहे भट्ठे रायसेन-भोपाल रोड पर सेहतगंज, नीमखेड़ा, रायसेन बायपास, रीछन नदी किनारे, राम छज्जा के पास और पठारी सहित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे हैं। एसडीएम मनीष शर्मा ने कहा कि जो लोग पारंपरिक रूप से मिट्टी का काम करते हैं, उनका संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने माना कि कुछ लोग इस व्यवस्था की आड़ में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। एसडीएम ने कहा कि यदि उच्च स्तर से निर्देश मिलते हैं तो बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, अवैध भट्ठों का मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और पारंपरिक कारीगर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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