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Ujjain Temples Holi: महिला मंडल के सदस्य ने बताया कि बरसाना, वृंदावन, मथुरा सभी जगह श्रीकृष्ण की रासलीला के साथ ही होली के लिए मशहूर है. वैसे ही ठाकुर जी की हवेली गोपाल मंदिर, नईपेठ गजलक्ष्मी मंदिर और मनकामनेश्वर महादेव के प्राणगन मे खाटू श्याम मंदिर पर फाग उत्सव मनाया गया.
फाग उत्सव यानी प्रेम और आनंद का पर्व. होली से पहले ही शहर में रंग बिखरने लगे हैं. चेहरे लाल-गुलाबी रंगों से सजने लगे हैं. होली पर्व को लेकर देशभर में तैयारियां जोरों पर हैं. बाजारों में रौनक है. खेतों में हरियाली के साथ मन में उल्लास देखने को मिल रहा है. वैसा ही उत्साह महाकाल की नगरी उज्जैन मे भी रंगभरी एकादशी से शुरू हो चुका है.
शानू यादव ने बताया, हर वर्ष की तरह फाल्गुन में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. महिला भजन मंडली की सदस्यों ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि फाग महीने में कृष्णजी ने राधाजी व गोपियों के साथ में होली खेल कर रासलीला की थी और फाग महोत्सव मनाया था. तभी से परंपरा चली आ रही है.
हर वर्ष की परंपरा के अनुसार, गोपाल मंदिर में पूरे साल विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पर्व श्रद्धा के साथ आयोजित किए जाते हैं. इसी क्रम में इस बार भी मंदिर परिसर में भव्य फाग महोत्सव का आयोजन किया गया. भक्ति, संगीत और रंगों से सजे इस उत्सव में श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में आस्था अर्पित की, भजन-कीर्तन और उल्लासपूर्ण वातावरण ने पूरे आयोजन को खास बना दिया.
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यह मंदिर कोयला फाटक के पास मनकामनेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है. यहा खाटू श्यामजी के मंदिर मे फाग उत्सव की धूम देखने को मिली. मंदिर के पुजारी रवि शुक्ला ने बताया, फाल्गुन मास मे रंगभरी एकादशी पर मंदिर मे विशेष पूजन-पाठ के बाद फाग उत्सव मनाया जाता है. इस बार भी भजन कीर्तन से इसकी शुरुआत हुई. फिर श्याम प्रेमियों ने जमकर बाबा के साथ होली खेली. इसके लिए उज्जैन के साथ देवास, इंदौर, रतलाम व अन्य जगहों के भी श्रद्धांलु शामिल हुए.
बाबा श्याम के भक्त अपने बच्चों को भगवान कृष्ण के साथ राधा की ड्रेस पहनाकर मंदिर पहुंचे. भक्तिमय माहौल के बीच भजन की धुन पर जमकर नन्हें कदम थिरकते हुए नजर आए. इतना ही नहीं, रंगभरी एकादशी पर पुष्टिमार्गीय हवेली इंद्रदमन गोवर्धनजी की हवेली कार्तिक चौक में ब्रज की होली जैसा माहौल बन गया. ठाकुरजी ने वैष्णवजन के साथ में खूब होली खेली और बगीचा में विराजे अबीर, गुलाल और खूब रंग ने उड़ाया.
भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थिली उज्जैन मे देवी-मंदिरों में भी फाग उत्सव की धूम देखने को मिली. सबसे पहले चामुंडा माता मंदिर मे जमकर रंग ग़ुलाल उड़ाया गया है. उसके बाद नई पेठ स्थित गजलक्ष्मी मंदिर मे भी रंगों का पर्व देखने को मिला.
गजलक्ष्मी मंदिर जो 2000 हज़ार वर्ष पुराना बताया जाता है. यहां ऐरावत हाथी पर माता गजलक्ष्मी विराजमान हैं. यहां भी फाग उत्सव के दौरान माता का विधिवत पूजन कर उत्सव की शुरुआत की गईं. उत्सव मे बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं ने माता को रंग-ग़ुलाल लगाया.
जैसे ही श्रद्धालुओं को जानकारी मिली कि आज माता के दरबार में फाग की मस्ती में झूमने का मौका मिलेगा, दोपहर से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई. शाम करीब 6 बजे के लगभग फाग उत्सव की शुरुआत हुई. इसमें जमकर रंग-गुलाल उड़ा और भक्ति में श्रद्धालु झूमते नज़र आए.