श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में शनिवार को ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण के तहत बोत्सवाना से 9 नए चीते लाए जा रहे है। लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा कर ग्वालियर पहुंचे इन चीतों को हेलीकॉप्टर के अलसुबह जरिए कूनो लाया गया। इस नई खेप के आने के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो जाएगी। केंद्रीय वन मंत्री बाड़े में छोड़ेंगे चीतों के आगमन पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहेंगे। वह प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ेंगे। नई खेप में 6 मादा और 2 नर चीते शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इससे कूनो में लिंगानुपात बेहतर होगा और भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं बढ़ेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीय मंत्री सुबह 7.30 बजे नई दिल्ली से विशेष विमान से रवाना होकर प्रातः 8.30 बजे ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेगे। यहां से 8.50 बजे ग्वालियर से हेलिकॉप्टर की मदद से कूनो नेशनल पार्क के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रातः 9.20 बजे कूनो स्थित हेलिपेड पहुंचेंगे। यहां बोत्सवाना से लाए जा रहे चीतों को कूनो पार्क मे छोड़ेंगे। इसके बाद वन मंत्री सुबह 10 बजे ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेंगे। सुधरेगा संतुलन और बढ़ेगी जेनेटिक विविधता नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना के चीतों के आने से कूनो में जेनेटिक विविधता और मजबूत होगी। कूनो में अब 18 मादा और 16 नर (वयस्क) चीते हो गए हैं।सभी 8 चीतों को अभी एक महीने तक विशेष क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, तीन अलग-अलग देशों के चीतों का संगम इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए एक निर्णायक चरण साबित होगा। भारत में चीतों की वर्तमान स्थिति 2010 में हुआ कूनो का चुनाव भारत में वर्ष 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से ही चीतों को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य से सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में चीता संरक्षण कोष के डॉ. लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया था, जिसमें कूनो को सबसे अनुकूल पाया गया। जिसमें 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य, कूनो पालपुर अभ्यारण एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया, इन तीनों में से भी कूनो अभ्यारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया।
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