कूनो में फिर गूंजी दहाड़! बोत्सवाना से आए 9 चीते, भारत में संख्या 47 पहुंची

कूनो में फिर गूंजी दहाड़! बोत्सवाना से आए 9 चीते, भारत में संख्या 47 पहुंची


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मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से 9 नए चीते पहुंच गए हैं. विशेष विमान से ग्वालियर लाकर हेलीकॉप्टर से कूनो भेजा गया. इन्‍हें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाड़ों में रिलीज किया. एक महीने क्वारंटाइन के बाद जंगली जीवन में छोड़ा जाएगा. इससे भारत में चीतों की संख्या 46 हो गई है. प्रोजेक्ट चीता सफलता की ओर बढ़ रहा है.

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मध्‍य प्रदेश में चीता प्रोजेक्‍ट के तहत 8 नए चीता कूनो पहुंचे हैं.

दीपक दंडोतिया/सुशील कौशिक 
श्‍योपुर/ग्‍वालियर. मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में आज एक और ऐतिहासिक क्षण दर्ज हो गया है. बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं. यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है जो प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत लाया गया है. भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया. केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया. इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 47 तक पहुंच गई है. कूनो में पहले से मौजूद चीतों की सफल प्रजनन दर और शावकों का जन्म इस प्रोजेक्ट की मजबूती दिखाता है. यह कदम न केवल चीता संरक्षण की दिशा में बड़ा है बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके इस राजसी जानवर को वापस लाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है. पार्क में विशेष तैयारियां की गई हैं जहां चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन में रखकर स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

यह ट्रांसलोकेशन अभियान वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है. बोत्सवाना सरकार ने भारत को ये चीते सौंपे हैं जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक है. प्रोजेक्ट चीता 2022 में नामीबिया से शुरू हुआ था जब 8 चीते लाए गए. 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए. अब बोत्सवाना से तीसरी खेप के साथ आबादी तेजी से बढ़ रही है. कूनो नेशनल पार्क की उपयुक्त पारिस्थितिकी, शिकार की उपलब्धता और सुरक्षित क्षेत्र ने चीतों के प्रजनन को संभव बनाया है. यहां कई मादाओं ने शावक दिए हैं जैसे गामिनी, ज्वाला, आशा आदि. यह सफलता दिखाती है कि भारत में चीता फिर से स्थापित हो सकता है. आने वाले चीतों को पहले ग्वालियर में विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद हेलीकॉप्टर से पार्क भेजा जहां 5 हेलीपैड तैयार हैं. यह ऑपरेशन तनाव मुक्त और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है ताकि चीतों का स्वास्थ्य प्रभावित न हो.

ग्वालियर एयरबेस पर चीतों की लैंडिंग और हेलीकॉप्टर ट्रांसफर
विशेष भारतीय वायुसेना विमान से बोत्सवाना से उड़ान भरकर चीते शुक्रवार रात 9-10 बजे ग्वालियर पहुंचे. यहां एक्सपर्ट टीम ने उनकी स्वास्थ्य जांच की. सुबह 8:30 बजे से दो हेलीकॉप्टरों में चीतों को लोड कर कूनो के लिए रवाना किया गया जबकि एक हेलीकॉप्टर एक्सपर्ट टीम के साथ गया. पार्क में सुरक्षित लैंडिंग के लिए 5 हेलीपैड बनाए गए. सुबह 9:30 बजे तक चीतों को कूनो पहुंचाकर क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा गया.

क्वारंटाइन और अनुकूलन प्रक्रिया के बीच 24×7 होगी निगरानी
नए चीतों को कम से कम एक महीने तक विशेष क्वारंटाइन एनक्लोजर में रखा जाएगा. यहां उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और पर्यावरण अनुकूलन की लगातार मॉनिटरिंग होगी. पशु चिकित्सक और वन अधिकारी 24×7 निगरानी करेंगे. यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि चीते जंगली जीवन के लिए पूरी तरह तैयार हों. क्वारंटाइन के बाद इन्हें बड़े क्षेत्रों में रिलीज किया जाएगा.

प्रोजेक्ट चीता की सफलता और वर्तमान स्थिति
प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 में नामीबिया से 8 और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए. कूनो में अब 35 चीते हैं जबकि 3 गांधी सागर अभयारण्य में. कई मादाओं ने शावक दिए हैं जिससे भारतीय जन्मे शावकों की संख्या 27 तक पहुंची है. गामिनी ने हाल ही में तीन शावक दिए. बोत्सवाना के 9 चीतों के साथ कुल 47 हो जाएंगे. लक्ष्य 50 से अधिक चीतों की आबादी है.

कूनो नेशनल पार्क की विशेषताएं और भविष्य की योजना
श्योपुर जिले में स्थित कूनो 748 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है. यहां पर्याप्त शिकार जैसे ब्लैकबक, चिंकारा उपलब्ध हैं. प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा के अनुसार पार्क में कई क्वारंटाइन बाड़े तैयार हैं. भविष्य में चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभयारण्यों में शिफ्ट करने की योजना है ताकि आबादी फैले और जोखिम कम हो.

संरक्षण का वैश्विक महत्व
यह अभियान चीता को भारत में वापस लाने का सपना पूरा कर रहा है जो 1952 में विलुप्त हो गया था. बोत्सवाना, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के सहयोग से यह संभव हुआ. सफल प्रजनन से पारिस्थितिकी संतुलन मजबूत होगा. मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र की टीम दिन-रात मेहनत कर रही है. यह खबर वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक है.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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