डॉक्टर साहब का तोड़ नहीं, एक ओर करते हैं लोगों का इलाज, तो दूसरी ओर नाक से बांसुरी बजाने का कमाल
मध्य प्रदेश के रेलवे अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. अवधेश अवस्थी किसी संगीत घराने से नहीं हैं. वे उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले असोथर के रहने वाले हैं. बचपन में कीर्तनों में अपने नाना जी के साथ मंजीरा बजाया करते थे. मंजीरे की उसी थाप ने उनके भीतर लय और ताल की ऐसी समझ पैदा की, जिसने आगे चलकर उन्हें एक कुशल बांसुरी वादक बना दिया. डॉक्टर साहब बताते हैं कि बचपन में मेले से खरीदी गई एक साधारण सी बांसुरी ही उनका पहला वाद्य यंत्र बनी. उस समय उन्हें ‘सा रे गा मा’ का ज्ञान नहीं था, बस फूंक मारने से निकलने वाली आवाज उन्हें मंत्रमुग्ध कर देती थी. कोशिश करते-करते उन्होंने स्वर निकालना सीखा. बाद में पिता जी के पास इंदौर में आ गए. यहां पर उन्होंने महसूस किया कि उनकी ताल कभी-कभी डगमगा जाती है, तो उन्होंने विधिवत संगीत सीखना शुरू किया. बांसुरी बजाने वाले डॉक्टर साहब ने सबसे पहले संगीत महाविद्यालय से तबला सीखा, ताकि ताल पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके. मेडिकल की पढ़ाई के दौरान भी उनका संगीत प्रेम कम नहीं हुआ. वे शाम के समय अपने गुरु क्लास लेते थे, जहा उन्हें शास्त्रीय संगीत और रागों की गहरी समझ मिली. इसी दौरान उन्होंने एक अनोखा प्रयोग नाक से बांसुरी बजाने का किया. 80 के दशक में शुरू किया गया यह प्रयोग आज उनकी पहचान बन चुका है और लोग इसे बेहद पसंद करते हैं.