पहली बार मकान और आबादी की गणना मोबाइल एप से होना है। इसलिए जो अधिकारी-कर्मचारी ये काम करेंगे उन्हें साइबर ठगों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। अभी चार्ज अधिकारियों व उनके स्टाफ की चार दिन की ट्रेनिंग हो चुकी है। इसी दौरान ऐसी कई बातें उन्हें बताई गईं जो साइबर ठगी से उन्हें बचाएंगी। जिन्होंने ट्रेनिंग ले ली है उन्होंने क्या सीखा, इसके लिए दो दिन प्रैक्टिकल भी होंगे। डेटा नैतिकता, गोपनीयता, सुरक्षा आदि को लेकर मास्टर ट्रेनर्स ने वह सारे टिप्स अधिकारियों को बताए जो जनगणना मुख्यालय ने बताए हैं। इसमें पहला सबक यह बताया गया कि मोबाइल का आईएमईआई नंबर सुरक्षित रखें। कैसे करेंगे, यह भी समझाया गया और निर्देश दिए गए कि 15 अंकों का आईएमईआई कहीं भी डायरी में नोट करके रखें। इसके बिना डिवाइस को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा। काम के दौरान या घर से मोबाइल गुम हो जाए तो इसकी सूचना तत्काल अधिकारी को देनी होती ताकि जनगणना का डेटा ब्लॉक हो। अब प्रैक्टिकल में भी बताएंगे सावधानी: जनगणना के पहले चरण में मकान गिने जाएंगे। इसमें लगभग छह हजार अधिकारी-कर्मचारी लगेंगे। इन्हें 24 से 27 फरवरी के बीच ट्रेनिंग दी जा चुकी है। सारी सावधानी व क्या करना है और क्या नहीं यह भी बता दिया गया है। इसके बाद उन्होंने कितना सीखा, यह जानने के लिए वर्तमान में ट्रेनिंग लेने वाले 60 से ज्यादा चार्ज अधिकारी व उनके कर्मचारियों का कलेक्ट्रेट में प्रैक्टिकल 6 व 7 मार्च को होना है।
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