जुगाड़ू युवा ने कबाड़ी को बनाया सोने की खान, दे रहा रोजगार, कमाई में मिला तगड़ा मुनाफा

जुगाड़ू युवा ने कबाड़ी को बनाया सोने की खान, दे रहा रोजगार, कमाई में मिला तगड़ा मुनाफा


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जुगाड़ू युवा ने कबाड़ी को बनाया सोने की खान, दे रहा रोजगार, मिला तगड़ा मुनाफा

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Success Story: आज हम आपको एक ऐसे युवा की सफल कहानी बताने जा रहे हैं जिसने पढ़ाई-लिखाई तो बहुत कम की. लेकिन पैसे कमाने का हुनर था तो कम उम्र से काम करना शुरू कर दिया. दरअसल, विकल्प अपने भाई लिंकन के साथ सालों पहले कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करते थे. लेकिन इसके बाद इन्होंने समोसा-जलेबी नाश्ता की दुकान खोली. जिसके बाद इनका बिजनेस चल गया.

Business Story: आज हम आपको एक ऐसे युवा की सफल कहानी बताने जा रहे हैं जिसने पढ़ाई-लिखाई तो बहुत कम की. लेकिन पैसे कमाने का हुनर था तो कम उम्र से काम करना शुरू कर दिया. दरअसल, विकल्प अपने भाई लिंकन के साथ सालों पहले कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करते थे. लेकिन इसके बाद इन्होंने समोसा-जलेबी नाश्ता की दुकान खोली. जिसके बाद इनका बिजनेस चल गया और आज यह लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं.

दोनों भाई करते थे कबाड़ का धंधा 
विकल्प चौरसिया बताते हैं कि आज से 5 साल पहले हम दोनों भाई कबाड़ का धंधा करते थे. ज्यादा पढ़ाई-लिखाई की नहीं थी तो कबाड़ का धंधा समझ में आया. ये धंधा बहुत ही संघर्ष भरा था. भयंकर ठंड हो या गर्मी की चिलचिलाती धूप हो, काम करना ही पड़ता था. गांव-गांव जाकर घूमना पड़ता था. लोग कबाड़ी वाला बोलते थे मन को अच्छा तो नहीं लगता था लेकिन धंधा था तो करना पड़ता था. सबसे बुरा फील तब होता था जब इतनी मेहनत करते थे और लोग अपने बच्चों को ताने सुनाते हुए कहते थे कि अगर पढ़ोगे नहीं तो फलाने के लड़के जैसा कबाड़ का धंधा करोगे तो बहुत बुरा लगता था.‌ पैसा इतना था नहीं कि दूसरा धंधा कर लें.

ऐसे आया आइडिया 
विकल्प बताते हैं कि जब हम दोनों भाई सालों साल कबाड़ का धंधा किया तो कुछ पूंजी इकट्ठी कर ली. भाई लिंकन ने आइडिया दिया कि हम भी नाश्ता-खाना की दुकान खोलेंगे. छतरपुर में जिला अस्पताल के सामने वालों का मिट्टी चूल्हा में नाश्ता बनाने वाले का कांसेप्ट समझा और यहीं से आइडिया आ गया.

ठेला में लगाई 4 साल दुकान 
हम दोनों भाईयों ने कम लागत में सबसे पहले ठेला में समोसा लगाना शुरू किया. पूंजी इतनी नहीं थी कि दुकान किराए से लेकर धंधा कर सकें. 4 सालों तक ठेला में ही समोसा, जलेबी, मंगूड़ी, ब्रेड पकोड़ा और शिमला मिर्च बनाया. कंपटीशन बहुत था तो सालों की मेहनत बाद पूंजी इकट्ठी हुई और दुकान किराए से लेकर स्थाई दुकान कर ली.

लोगों को भी दिया रोजगार 
विकल्प बताते हैं कि हमारे यहां सबसे ज्यादा डिमांड समोसे की रहती है. सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक कस्टमर आते हैं. इसलिए काम बढ़ गया तो 2 लोगों को भी साथ में रख लिया. मैं खुद ही सारे आइटम बना लेता हूं लेकिन डिमांड ज्यादा रहती है तो काम करने के लिए भाई समेत 4 लोग लगे रहते हैं.

हर दिन इतनी कमाई 
विकल्प बताते हैं कि जीवन में इतना बदलाव आया है कि पहले धूप में गांव-गांव घूमना पड़ता था. वहीं आज छांव में स्थाई जगह में बैठकर सुकून मिलता है. जिंदगी बहुत बदल गई है. हमारी दुकान में हर दिन सैकड़ों की संख्या में कस्टमर आते हैं. यहां तक जो भी कस्टमर आता है तो मिनिमम 10 रुपए का तो नाश्ता करता ही है. इसलिए हर दिन 2 से 3000 रुपए की कमाई हो जाती है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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