रंग, स्वाद और रोजगार का संगम: भोपाल में होली मेले का आयोजन, आजीविका दीदियों ने बनाया ऑर्गेनिक गुलाल और महुआ के लड्डु – Bhopal News

रंग, स्वाद और रोजगार का संगम:  भोपाल में होली मेले का आयोजन, आजीविका दीदियों ने बनाया ऑर्गेनिक गुलाल और महुआ के लड्डु – Bhopal News




राजधानी भोपाल में होली के अवसर पर आजीविका दीदियों ने रंग और रोजगार का अनोखा संगम रचा है। डीबी सिटी मॉल के पास भोपाल हाट में 21 फरवरी से 2 मार्च तक आजीविका मार्ट के रूप में होली मेला लगाया गया है। इस मेले का उद्देश्य आजीविका समूहों की महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना, उनके उत्पादों को पहचान दिलाना और लोगों को शुद्ध व घरेलू सामान उपलब्ध कराना है। यहां मध्य प्रदेश के कई जिलों से आई जीविका दीदियां अपने हाथों से बने उत्पाद बेच रही हैं। भोपाल समेत 15 से 20 जिलों की जीविका दीदियां शामिल इस होली मेले में भोपाल, भिंड, मुरैना, इंदौर, सीहोर, सागर, सीधी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, सतना, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी, धार, झाबुआ, मंदसौर, खरगोन, बैतूल, विदिशा और बुरहानपुर जैसे जिलों की जीविका दीदियां शामिल हुई हैं। मेले में हैंडलूम उत्पाद, ऑर्गेनिक गुलाल और अलग अलग जिलों के पारंपरिक खान पान की व्यवस्था की गई है। यहां पहुंचने वाले लोगों को एक ही स्थान पर पूरे प्रदेश की संस्कृति और स्वाद की झलक देखने को मिल रही है। बालाघाट की दीदियों ने बताया ऑर्गेनिक गुलाल बनाने की प्रक्रिया बालाघाट से आई आजीविका दीदियों ने बताया कि होली के लिए पूरी तरह ऑर्गेनिक गुलाल तैयार किया गया है। गुलाल बनाने के लिए पहले अरारोट या पलाश के फूल को सुखाया जाता है। फिर उसमें अलग-अलग रंग बनाने के लिए तरहा तरहा के प्राकृतिक सामग्री मिलाते हैं जैसे- पीला रंग बनाने के लिए हल्दी और बेसन, लाल रंग के लिए चुकंदर। दीदियों का कहना है कि इस गुलाल से किसी प्रकार का रिएक्शन नहीं होता क्योंकि इसमें कोई केमिकल नहीं मिलाया जाता। पर्यावरण और त्वचा दोनों के लिए यह सुरक्षित है। सीधी से आया महुआ के लड्डू सीधी जिले से आई जीविका दीदियों ने महुआ के लड्डू तैयार कर लाए हैं। उनका कहना है कि यदि इन लड्डुओं का नियमित सेवन किया जाए तो जोड़ों के दर्द, सांस फूलने और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। अनूपपुर से आया कोदो के बिस्किट अनूपपुर और अन्य जिलों से आई दीदियां कोदो के बिस्किट लेकर आई हैं। एक जीविका दीदी ने बताया कि कोदो सीधे किसानों से लिया जाता है, उसे साफ कर हाथों से बिस्किट तैयार किए जाते हैं। इसमें किसी प्रकार का मिलावटी पदार्थ नहीं मिलाया जाता। शुद्ध मसाले, खोया और घर की बनी गुजिया भी उपलब्ध मेले में ऑर्गेनिक और शुद्ध मसाले, खोया और खोए की गुजिया भी उपलब्ध है। पारंपरिक तरीके से तैयार की गई इन मिठाइयों की मांग काफी देखी जा रही है। भोपाल हाट पहुंचे धर्मेंद्र सेठ ने बताया कि इस होली मेले की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां घर का बना सामान मिल रहा है। आज मिलावट के दौर में शुद्ध खान पान की चीजें मिलना कठिन है, लेकिन यहां भरोसे के साथ खरीदारी की जा सकती है। रंगों के साथ रोजगार का भी उत्सव यह होली मेला केवल खरीद बिक्री का केंद्र नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की मिसाल भी है। आजीविका मार्ट के माध्यम से आजीविका समूहों की महिलाओं को अपनी कला और मेहनत दिखाने का मंच मिला है। होली के रंगों के साथ आजीविका का यह संगम न केवल त्योहार को खास बना रहा है बल्कि ग्रामीण बहनों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल के नंदीश्वर जिनालय में प्राचीन जैन ग्रंथों की प्रदर्शनी:1300 वर्ष पुराने ताड़पत्र ग्रंथ से लेकर स्वर्णांकित दुर्लभ हस्तलिपियां आकर्षण का केंद्र भोपाल के लालघाटी स्थित नंदीश्वर जिनालय इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक वैभव का केंद्र बना हुआ है। यहां चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दौरान भगवान सिद्ध की आराधना में श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ लीन हैं। पूरी खबर पढें…



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