ग्वालियर नगर निगम की विशेष बैठक सोमवार को भारी हंगामे और धरने के बीच संपन्न हुई। यह बैठक निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए छह बिंदुओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों के तीखे विरोध के कारण माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बैठक को दो बार स्थगित करना पड़ा। इस दौरान एमआईसी सदस्य भी सभापति की आसंदी के सामने धरने पर बैठ गए। बैठक का एक मुख्य मुद्दा महाराज बाड़ा स्थित पुराने निगम मुख्यालय भवन से संबंधित था। निगम का नया मुख्यालय सिटी सेंटर में स्थानांतरित होने के बाद, इस ऐतिहासिक भवन को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित किया गया है। एमआईसी की अनुशंसा पर, भवन के दो हॉल और छह दुकानों को लीज पर देने का प्रस्ताव विशेष बैठक में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष हरिपाल और पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि लीज के नाम पर दुकानों को किराए पर देने की तैयारी है, जिससे किसी विशेष व्यक्ति को अनुचित लाभ मिल सकता है। पार्षदों ने प्रस्ताव की शर्तों पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। वहीं, बीजेपी के एक पार्षद ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पुराने मुख्यालय की स्थिति जर्जर हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पहल पर ही पूर्व निगम आयुक्त को इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए लीज पर देने का सुझाव दिया गया था, ताकि निगम की आय में वृद्धि हो सके और आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इसके अतिरिक्त, हुरावली क्षेत्र में निगम की स्वामित्व वाली भूमि पर व्यावसायिक-आवासीय अत्याधुनिक परिसर के निर्माण के प्रस्ताव पर भी तीखी बहस हुई। विपक्ष ने तर्क दिया कि दोनों परियोजनाओं की शर्तें अलग-अलग हैं, जबकि उनका स्वरूप समान है। इस जोरदार हंगामे के बावजूद, प्रभारी सभापति गिर्राज कंसाना ने निगम की आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चार प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद बैठक को 6 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
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