खेत में AC लगाकर सर्दी की फसल उगाएंगे, किसान का मई-जून में 4-5 गुना मुनाफा कमाने का प्लान

खेत में AC लगाकर सर्दी की फसल उगाएंगे, किसान का मई-जून में 4-5 गुना मुनाफा कमाने का प्लान


सागर (मध्य प्रदेश): गर्मी का मौसम आते ही घरों में कूलर, पंखे, एसी चलने शुरू हो जाते हैं. हर साल गर्मी में बढ़ते तापमान के कारण अब तो गांवों में भी लोग घरों में एसी लगाने लगे हैं. ऐसे में मई-जून की चिलचिलाती गर्मी में चलने वाले गर्म हवा के थपेड़े पेड़-पौधों को झुलसा देते हैं. इसी दिक्कत को देखते हुए सागर के एक किसान को ऐसा आइडिया आया, जिसने कमाल कर दिया. किसान ने पेड़-पौधों के लिए भी एसी की व्यवस्था कर दी. खेत में ही एसी जैसा वातानुकूलित सिस्टम तैयार कर दिया. जब इसका उपयोग किया तो पता चला कि बाउंड्री के अंदर के तापमान और बाहर के तापमान में 8 से 12 डिग्री तक अंतर था.

मई-जून में करें सर्दी वाली खेती
खेत में फसलों के लिए एसी जैसा सिस्टम बनाने के लिए किसान ने जुगाड़ से पूरा स्ट्रक्चर खड़ा किया है. सागर के युवा किसान आकाश चौरसिया का दावा है कि इस जुगाड़ से किसान वातानुकूलित खेत में ब्रोकली, मटर, गोभी, शिमला मिर्च जैसी महंगी फसले गर्मी में भी उगा सकते हैं. यानी जो सर्दियों में फसलें उगाते हैं, वही अप्रैल, मई, जून में भी उगा सकते हैं. इस दौरान इनकी डिमांड अधिक और सप्लाई कम होने से भाव चार-पांच गुना अधिक तक मिल जाएगा.

ऐसे बनाएं खेत वाला एसी
जब हम रबी सीजन की फसल ले रहे होते हैं, तब उसमें जो बीड घास उगती है, उसकी कटाई करवा के सूखने के लिए रख दें. इधर जब गर्मी के मौसम में फसल लगानी है तो उसके पहले खेत के एसी का स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए बांस और बल्लियां लेकर खेत में निश्चित दूरी पर लगाएं. ऊपर से एक जीआई तार का जाल बना देते हैं. इसके ऊपर खरपतवार को डाल देते हैं. नीचे बेड बनाकर फसल लगते हैं. माइक्रो स्प्रिंकलर की मदद से रोजाना सिंचाई करते हैं. जिस तरह से कूलर की जाली पर पानी गिर कर वह ठंडी हवा देता है. इस तरह गर्म हवाओं की टकराहट से यह भी वातावरण को ठंडा करता है.

बीड घास को हटाने में पैसा क्यों खराब करना…
सागर के कपूरिया में 16 साल से जैविक खेती कर रहे और खेती में लगातार प्रयोग करने वाले युवा किसान आकाश चौरसिया में यह मॉडल तैयार किया है. इसको लेकर आकाश बताते हैं कि यह बहुत सिंपल तकनीक है. अपनी भाषा में इसको जुगाड़ कह सकते हैं. हमने बांस-बल्ली का उपयोग किया और ऊपर लोहे के तार का जाल बनाया. जाल के ऊपर बीड ग्रास को डाला. यह बीड ग्रास वही है, जो हर साल खेतों में खरपतवार की तरह उगती है. लेकिन, हम उसका खत्म करने के लिए वीडी साइट डालते हैं, जिससे हम खेती का खर्च बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी को नुकसान भी पहुंचाते हैं. उसकी वजह से पौधों के जनरेटर स्ट्रक्चर पर बुरा प्रभाव पड़ता है. फिर वही जहर अनाज के माध्यम से हमारे पेट में आता है, जिसका हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है. हम उसी घास को खेत में ही नेचुरली तरीके से उगने देते हैं, जिससे पैसे भी बचते हैं. फिर घास को काटकर सूखा लेते हैं. फिर उसको ऊपर स्ट्रक्चर पर डाल कर स्टिक से बांध देते हैं, ताकि वह हवा में उड़े नहीं.

ऐसे ठंडा रहता है खेत
जब खेत में माइक्रो स्प्रिंकलर से पानी देते हैं, तब उसकी वजह से पानी की बूंदें घास पर जाकर टकराती हैं. कुछ बूंदें जो जमीन पर गिरती हैं सिंचाई के रूप में वह पानी वाष्पीकृत होता है, वाष्पीकृत पानी स्ट्रक्चर पर लगी घास ऑब्जर्व करती है. जब यह नमी को अडॉप्ट करती है, फिर जब बाहर गर्म हवा चलती है और जब बाहर की गर्म हवा से टकराती है तो नीचे का वातावरण पूरा ठंडा हो जाता है, इसलिए इसको पौधों का अर्ध वातानुकूलित घर भी कह सकते हैं.

तापमान में इतना अंतर मिलेगा
इस तरह गर्मी के लिए यह ऐसी जैसा वातावरण बन जाता है. जब बाहर 40-45 डिग्री का तापमान होता है, तब इस मॉडल के अंदर 30 से 32 डिग्री का तापमान होता है. जब इतना कम तापमान हो जाता है तब हम वह फसल आराम से उगा सकते हैं जो सर्दी में 25 डिग्री के आसपास के तापमान में होती हैं. किसान इस विधि का फायदा उठा सकता है. गर्मी में महंगी फसलें लगने से चार गुना ज्यादा मुनाफा होता है.



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