दतिया में इस वर्ष होलिका दहन को लेकर खासा उत्साह है, लेकिन पूर्णिमा तिथि रात में पड़ने और चंद्रग्रहण के प्रभाव के कारण समय को लेकर लोगों में थोड़ा असमंजस भी है। भद्रा और ग्रहण के साए के चलते इस बार होलिका दहन के समय में बदलाव किया गया है। शहर में कहीं रात 12 बजे के बाद तो कहीं ब्रह्ममुहूर्त में होलिका दहन की तैयारी है। वहीं, दतिया में इस बार धुलेंडी (रंग) 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को खेली जाएगी। पीतांबरा पीठ और गोविंद जी मंदिर में ये रहेगा समय शहर की प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पीतांबरा पीठ में सुबह 4 बजे होलिका दहन किया जाएगा। वहीं, ऐतिहासिक गोविंद जी मंदिर में प्रातः 5:30 बजे होलिका जलाई जाएगी। श्रद्धालु इन दोनों प्रमुख स्थानों पर विशेष पूजन और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचेंगे, जिसके लिए मंदिर प्रबंधन ने भी अपनी सारी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। होलीपुरा से शुरू होती है दहन की पुरानी परंपरा दतिया शहर में सबसे पहले होली जलाने की पुरानी परंपरा होलीपुरा में निभाई जाती है। यहां की होली जैसे ही प्रज्ज्वलित होती है, शहर के लोग वहां से जलते हुए कंडे लेकर जाते हैं और अन्य स्थानों पर अपनी होलिका का दहन करते हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई जा रही है। पंडित बोले- सुबह 6.15 बजे से लग जाएगा सूतक काल पंडित कालका प्रसाद मुद्गल के अनुसार, इस बार होली के अवसर पर भद्रा और चंद्रग्रहण दोनों का साया रहेगा। सुबह 6.15 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें होलिका दहन करना वर्जित है। ऐसे में रात 12.50 बजे से 2 बजकर 1 मिनट तक होलिका दहन किया जा सकता है। इसके अलावा सुबह 5.30 बजे भी होलिका दहन का मुहूर्त रहेगा। बाजारों में रौनक, 4 मार्च को उड़ेगा हर्बल गुलाल त्योहारी सीजन के चलते दतिया के मुख्य बाजारों में होली की रौनक चरम पर है। देर रात तक दुकानों पर रंग-बिरंगे गुलाल, हर्बल कलर, आकर्षक पिचकारियां और खिलौने खरीदने वालों की भारी भीड़ लगी है। व्यापारी भी अच्छे कारोबार की उम्मीद में उत्साहित नजर आ रहे हैं। इस बार 3 मार्च को रंग नहीं खेला जाएगा, बल्कि 4 मार्च को पूरे शहर में धूमधाम से होली खेली जाएगी।
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