होली के अवसर पर पन्ना शहर में ब्रज और बरसाना की पारंपरिक झलक देखने को मिल रही है। यहां की होली राधा-कृष्ण भक्ति की पुरानी परंपराओं से जुड़ी है, जहां किलकिला नदी के तट पर स्थित श्री महारानी जी (राधिका जी) का मंदिर और श्री प्राणनाथ जी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। प्रणामी संप्रदाय के इस तीर्थ स्थल पर हर वर्ष फाल्गुन मास में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। राधिका मंदिर में रात्रि जागरण और फाग गायन होलिका दहन से एक दिन पूर्व राधिका मंदिर में विशेष श्रृंगार किया गया और रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। भोग अर्पण के बाद मंदिर प्रांगण में फाग गायन शुरू हुआ, जिसमें “मोहन खेलत होरी…” जैसे पारंपरिक धमार गीत गाए गए। श्रद्धालुओं ने भजनों के माध्यम से राधिका जी को फाग खेलने का आमंत्रण दिया। यह आयोजन पूरी रात चलता रहा, जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आए भक्तों ने भी हिस्सा लिया। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु पन्ना की इस पारंपरिक होली में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पन्ना धाम पहुंचे हैं। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक यहां दंड स्थापना से लेकर होलिका दहन और रंगोत्सव तक के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पन्ना में ब्रज संस्कृति की इन परंपराओं को लंबे समय से इसी तरह सहेज कर रखा गया है, जो इस क्षेत्र को एक विशेष पहचान दिलाता है।
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