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इंदौर में साइबर ठगों ने वीडियो कॉल पर बेटे को चाकू मारते दिखाकर दंपति से 1.02 लाख रुपये ठग लिए. बाद में बेटा सुरक्षित घर लौट आया और मामला फर्जी निकला. जांच में सामने आया कि कॉल हरियाणा से, बैंक खाता यूपी का और रकम निकासी बिहार से हुई. क्राइम ब्रांच अब डीपफेक तकनीक के एंगल से अंतरराज्यीय गिरोह की जांच कर रही है.
मिथिलेश गुप्ता
इंदौर. साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने माता-पिता की सबसे बड़ी कमजोरी को निशाना बनाया. वीडियो कॉल पर बेटे को चाकू मारते दिखाया गया. जान से मारने की धमकी दी गई. घबराए दंपति ने बिना देर किए एक लाख दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए. अगले ही दिन बेटा सुरक्षित घर लौटा तो पूरी सच्चाई सामने आई. यह अपहरण नहीं, बल्कि तकनीक के सहारे रचा गया सुनियोजित जाल था. जांच में खुलासा हुआ कि इस वारदात की कड़ियां कई राज्यों से जुड़ी हैं. कॉल हरियाणा की सिम से आया. रकम उत्तर प्रदेश के खाते में गई. पैसा बिहार के एटीएम से निकाला गया. क्राइम ब्रांच अब इस अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क की परतें खोल रही है. शुरुआती जांच में डीपफेक और एआई तकनीक के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है, जिसने इस ठगी को और खतरनाक बना दिया.
एमआईजी थाना क्षेत्र में रहने वाले गोविंद प्रजापत और पूजा प्रजापत के बेटे ने 2 फरवरी को कोचिंग जाने की बात कही थी. वह देर रात तक घर नहीं लौटा. परिवार चिंतित था. 3 फरवरी को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया. स्क्रीन पर उनका बेटा दिखाई दिया. कॉल करने वाला युवक को चाकू मारते दिखा रहा था. धमकी दी गई कि पैसे नहीं भेजे तो जान ले ली जाएगी. घबराए माता-पिता ने बताए गए खाते में 1,02,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. अगले दिन बेटा सुरक्षित घर लौटा. उसने बताया कि वह बिना बताए मंदिर दर्शन के लिए गया था. तब परिवार को ठगी का अहसास हुआ.
हरियाणा की सिम, यूपी का बैंक खाता, बिहार के एटीएम से निकाली रकम
प्राथमिक जांच में सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर से कॉल आया, वह हरियाणा से जारी सिम थी. जिस बैंक खाते में रकम जमा कराई गई, वह उत्तर प्रदेश का निकला. रकम की निकासी बिहार के एक एटीएम से की गई. यह पैटर्न संगठित साइबर गिरोह की ओर इशारा करता है. अलग-अलग राज्यों का इस्तेमाल कर ट्रैकिंग को जटिल बनाया जाता है. पुलिस डिजिटल फुटप्रिंट, सीसीटीवी और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
एआई और डीपफेक का खतरनाक इस्तेमाल
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि शुरुआती जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के दुरुपयोग की आशंका है. आशंका है कि ठगों ने डीपफेक तकनीक से फर्जी वीडियो तैयार किया. डीपफेक में किसी व्यक्ति के चेहरे और हावभाव को डिजिटल रूप से बदलकर असली जैसा वीडियो बनाया जाता है. इससे आम व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. पुलिस इस एंगल से भी तकनीकी जांच कर रही है.