इंदौर में ‘AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026’ का सआयोजन हुआ। शहर में पहली बार इतने बड़े स्तर पर राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे चिकित्सा और शोध क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि होम्योपैथी सस्ती, सुलभ और अपेक्षाकृत दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति है, जो आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि होम्योपैथी भारत की “स्वास्थ्य जीवन रेखा” बनने की क्षमता रखती है। उन्हें आश्वस्त किया कि वे इस विषय को लोकसभा में प्रमुखता से उठाएंगे।
डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि अब होम्योपैथी से अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों का भी सफल इलाज हो रहा है।
कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए विशेषज्ञों ने होम्योपैथी की वैज्ञानिकता, प्रभावशीलता और सामाजिक स्वीकार्यता पर अपने प्रेजेंटेशन दिए। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एके द्विवेदी ने अप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में अपने सफल उपचार अनुभव साझा किए। इस दौरान जयपुर के लालाराम और उत्तर प्रदेश के एडवोकेट यशपाल सिंह का विशेष उल्लेख किया गया।

कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. विकास सिंघल ने कहा कि होम्योपैथी अब जटिल मामलों में भी सकारात्मक परिणाम दे रही है।
होम्योपैथी अब केवल सर्दी-जुकाम तक सीमित नहीं
कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. विकास सिंघल ने कहा कि एक समय होम्योपैथी को केवल सर्दी-जुकाम तक सीमित समझा जाता था, लेकिन आज यह कैंसर के सहायक उपचार, बोन मैरो विकार, अप्लास्टिक एनीमिया, ऑस्टियोमायलाइटिस, बांझपन, त्वचा रोग, बाल झड़ना, एडीएचडी व ऑटिज्म जैसे जटिल मामलों में भी सकारात्मक परिणाम दे रही है।
इविडेंस बेस्ड केस से मरीजों को दी जा सकती है अच्छी लाइफ

डॉ. विभा मेवाडा शर्मा ने अपने स्किन डिसीज पर प्रेजेंटेशन दिया।
इविडेंस बेस्ड केस से मरीजों को दी जा सकती है अच्छी लाइफ
डॉ. विभा मेवाडा शर्मा ने अपने स्किन डिसीज पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने इविडेंस बेस्ड केस को लेकर बताया कि जो बीमारी असाध्य बताई जाती है। उसे होम्योपैथी से बेहतर ठीक किया जा सकता है। इससे मरीजों को अच्छी लाइफ स्टाइल दी जा सकती है।

डॉ. सुखजीतसिंह कौर बटला (मोहाल, पंजाब)।
होम्योपैथी के नतीजों के लिए धैर्य जरूरी
डॉ. सुखजीत सिंह कौर बटला (मोहाल, पंजाब) ने बताया कि बहुत सारे ऐसे केस सामने आए हैं। जिसमें आईवीएफ फेल हो गया था और दंपति 18-20 साल तक कई तरह का ट्रीटमेंट करवाकर आए, उसमें होम्योपैथी ने अच्छा सक्सेस दिया। उनका कहना है कि पहले लोग एलोपैथी की ओर रुख करते हैं। जिससे काफी समय खराब हो जाता है। होम्योपैथी के नतीजों के लिए उन्हें धैर्य रखना पड़ेगा।

डॉ. रंजीत सोनी (CCRH, सिलीगुडी)।
डेवलप डिजिटल प्लेटफॉर्म सबसे बेहतर
डॉ. रंजीत सोनी (CCRH, सिलीगुडी) ने बताया कि परिषद एविडेंस बेस्ड रिसर्च पर तीव्र गति से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि CCRH द्वारा डेवलप डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देश के डॉक्टर्स सफल और प्रमाणित केस अपलोड कर सकते हैं, जिससे शोध और दस्तावेीकरण को सशक्त आधार मिलेगा।
मानसिक रोगों में होलिस्टिक अप्रोच प्रभावी
डॉ. वैभव चतुर्वेदी (कोकीलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल) ने मानसिक रोगों के उपचार में होलिस्टिक अप्रोच को प्रभावी बताते हुए कहा कि रोगी के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक पहलुओं को समग्र रूप से ध्यान में रखकर उपचार करने से तेज और स्थायी सुधार संभव है।
डॉ. अथर्व द्विवेदी ने कहा कि भारत को “डायबिटीज कैपिटल” बनने से रोकने के लिए लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को समन्वय के साथ मानवता के हित में कार्य करना चाहिए, तभी मधुमेह और अन्य जीवनशैली संबंधी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत हुए रिसर्च पेपर्स
कॉन्फ्रेंस में हेयर डिफ्लुवियम, तीव्र आपात स्थितियों का प्रबंधन, महिलाओं की समग्र चिकित्सा, ऑन्कोलॉजी में प्री व पोस्ट होम्योपैथिक उपचार, क्रॉनिक ऑस्टियोमायलाइटिस, यूरोथेलियल कार्सिनोमा, यूरोलिथियासिस, ऑटोइम्यून त्वचा रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, एंग्जायटी डिसऑर्डर, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, इंटीग्रेटिव मेडिसिन, वल्वल पेन सिंड्रोम, जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, पीसीओएस, कैंसर, डर्मेटोलॉजी, सिस्टाइटिस और एग्रोहोम्योपैथी जैसे विविध विषयों पर एक्सपर्टस ने अपने रिसर्च और केस स्टडी प्रस्तुत किए।