चंद्र ग्रहण के कारण मंदिर बंद….सूतक काल जारी: ग्वालियर में शाम को शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे पट, होंगे भगवान के दर्शन – Gwalior News

चंद्र ग्रहण के कारण मंदिर बंद….सूतक काल जारी:  ग्वालियर में शाम को शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे पट, होंगे भगवान के दर्शन – Gwalior News




2026 का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण आज होने की वजह से ग्वालियर के प्रमुख मंदिरों के पट सुबह से बंद कर दिए गए। सुबह 6:20 बजे सूतक काल शुरू होते ही देवदर्शन वर्जित कर दिए गए। पट शाम 6:46 बजे ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद खोले जाएंगे। लगभग 12 घंटे तक श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे। राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर सहित कई मंदिरों में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। शाम को ग्रहण समाप्त होने पर गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद विधि-विधान से आरती होगी। सूतक में पूजा, स्पर्श और भोग वर्जित ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूतक काल में पूजा-अर्चना, मूर्तियों का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित माना जाता है। इसी कारण दिनभर मंदिरों में नियमित धार्मिक क्रियाएं स्थगित रहेंगी। सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि यह खग्रास चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में दिखाई देगा। ग्वालियर अंचल में ग्रहण का दृश्य प्रभाव करीब 28 मिनट तक रहने का अनुमान है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उन्हें घर में रहने और नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने को कहा गया है। ग्रहण के बाद स्नान और दान का महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन पकाना और खाना वर्जित रहता है। पहले से बने भोजन में तुलसी पत्र डालकर सुरक्षित रखने की परंपरा है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है। पृथ्वी की छाया से होता है चंद्र ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, जिससे वह लालिमा लिए दिखाई देता है।



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