दमोह के मानस भवन में युवा नाट्य मंच द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह सोमवार रात संपन्न हो गया। समापन दिवस पर स्थानीय नाट्य संस्था युवा नाट्य मंच ने ‘लोकमाता अहिल्या’ नाटक का मंचन किया। इस नाटक के माध्यम से भारतीय इतिहास और नारी शक्ति को प्रदर्शित किया गया। डॉ. उमेश चौरसिया द्वारा लिखित और वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव अयाची द्वारा निर्देशित यह नाटक होलकर साम्राज्य की महारानी अहिल्या बाई होलकर के जीवन प्रसंगों पर आधारित था। इसमें उनके कुशल प्रशासन, न्यायप्रियता, धर्मपरायणता और विकास कार्यों को दर्शाया गया। अहिल्या बाई को सती होने से रोका नाटक की कहानी के अनुसार, कुम्हेर के युद्ध में पति खंडेराव होलकर के निधन के बाद अहिल्या बाई सती होने को आतुर थीं। हालांकि, उनके ससुर मल्हार राव होलकर ने अपनी और मालवा की सौगंध देकर उन्हें सती होने से रोका और मालवा का राज्य संभालने का आदेश दिया। ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के बाद मालवा साम्राज्य में प्रशासनिक गड़बड़ियां शुरू हो गईं। मालवा के दीवान गंगाधर राव तात्या (गंगोबा काका) ने इन गड़बड़ियों का आरोप अहिल्या बाई के एकमात्र पुत्र मालेराव होलकर पर लगाया, जो दिन-रात नशे में धुत रहते थे। कुछ समय बाद मालेराव का भी निधन हो गया, जिससे अहिल्या बाई टूट गईं। इस कठिन समय में सूबेदार तुकोजी राव तात्या ने उन्हें ढाढस बंधाया और राज्य के संचालन में सहयोग किया।
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