होली पर गर्र प्रथा! ऑयल-पेंट से सने खंभे पर चढ़ते हैं पुरुष, रोकती हैं महिलाएं

होली पर गर्र प्रथा! ऑयल-पेंट से सने खंभे पर चढ़ते हैं पुरुष, रोकती हैं महिलाएं


Last Updated:

Holi 2026: कुरेंडा गांव के बुजुर्ग टेकराम राणा ने लोकल 18 से कहा कि यह परंपरा करीब 65 साल पुरानी है. गांव के दो बुजुर्गों ने इस प्रतियोगिता को शुरू करवाया था. तब से लेकर अब तक हर साल यह प्रतियोगिता होती आ रही है.

बालाघाट. होली का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. होली एक ऐसा पर्व है, जिसको लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं हैं. होली से जुड़ी परंपराओं का अपना एक अलग महत्व और एक इतिहास जुड़ा होता है. एक ऐसी ही प्रथा और परंपरा बालाघाट के आदिवासी बहुल विकासखंड परसवाड़ा के कुरेंडा गांव में होती है. गांव में एक खास मेला लगता है, जो होली खेलने के अगले दिन होता है. इस मेले को मेघनाथ का मेला कहते हैं. इसे देखने के लिए लोग दूरदराज से आते हैं. मेले में गर्र परंपरा आकर्षण का केंद्र होती है, जो दिखने में मलखंब जैसी प्रतियोगिता होती लेकिन वह मलखंब नहीं है. इसमें एक करीब 25 फीट का लकड़ी का खंभा होता है. इसके ऊंचे सिरे पर नारियल को कपड़े में लपेटकर बांधा जाता है और इसपर गांव के पुरुष चढ़ते हैं और इसे उतारने की कोशिश करते हैं. अब आपको यह आसान लग रहा होगा लेकिन इसमें एक ट्विस्ट है. ट्विस्ट यह है कि लकड़ी के खंभे पर ऑयल और पेंट लगा होता है. ऐसे में इसपर चढ़ना बेहद कठिन हो जाता है. वहीं ऊपर एक डिब्बा रखा जाता है, जहां से लगातार ऑयल या पेंट बहाते रहते हैं, जिससे खंभे पर चिकनाहट बनी रहती है.

यह खेल सिर्फ एक परंपरा से नहीं बल्कि हंसी-मजाक से भी जुड़ा है. पुरुष तेल भरे चिपचिपे खंभे पर चढ़ने की कोशिश करते हैं, तो महिलाएं इस खेल में उन्हें रोकने की कोशिश करती हैं. ऐसे में यह खेल और भी रोमांचित हो जाता है. घंटों तक संघर्ष चलता है और आखिर में कोई न कोई इस कठिन टास्क को पूरा कर ही लेता है. गांव का जो भी युवक इस लक्ष्य को हासिल कर लेता है. उसे गांव के लोग उचित इनाम देते हैं.

65 साल पुरानी है प्रथा
कुरेंडा गांव के बुजुर्ग टेकराम राणा ने लोकल 18 को बताया कि यह परंपरा करीब 65 साल पुरानी है. गांव के दो बुजुर्गों ने कहीं से देखकर इस प्रतियोगिता को गांव में शुरू करवाया था. तब से लेकर अब तक यह प्रतियोगिता होती आ रही है. गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसमें हिस्सा लेते हैं. आज तक किसी प्रकार दुर्घटना नहीं हुई है. इसके साथ ही यहां पर होली का खास मेला भी लगता है. इसे देखने के लिए सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं आते बल्कि दूर-दूर से लोग भी यहां आकर मेले का लुत्फ उठाते हैं.

भजन और नृत्य भी आकर्षण का केंद्र
इस खास मेले की शुरुआत पूजा-पाठ और नृत्य से होती है. इसमें गांव की भजन मंडली भजन गाती है और एक शख्स नृत्य भी करता है. इस दौरान लोग काफी उत्साह में नजर आते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link