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सागर का वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों की तीसरी रहबास बनने की दिशा में तैयार हो रहा है. 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन को देखते हुए 450 वनकर्मियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. जंगल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए फायर लाइन कटिंग, अतिरिक्त फायर श्रमिकों की तैनाती और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की गई है.
सागर. प्रकृति से भरपूर अपनी अद्भुत भौगोलिक बनावट के लिए जाना जाने वाला वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों के लिए तीसरी रहबास के रूप में तैयार हो रहा है. इस समय टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, भालू , हाथी, चीतल, चिंकारा नीलगाय के साथ सैकड़ो प्रजाति के पक्षियों से गुलजार है लेकिन गर्मी का मौसम आते ही कई तरह की चुनौतियां भी आ जाती हैं. खास करके आगजनी की घटनाएं जंगल को तो नुकसान पहुंचाती ही हैं. पशु पक्षियों के लिए भी काफी दर्दनाक साबित हो जाती हैं.
ऐसे में पिछले सालों में हुई घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार गर्मी का मौसम शुरू होते ही टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया है. कोई भी आगजनी की घटना बड़ा रूप ना ले पाए इसकी ट्रेनिंग भी दिलवाई गई है. वन कर्मियों को जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं. इसके अलावा गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी सबसे बड़ी आवश्यकता होती है. इसके इंतजाम भी टाइगर रिजर्व के अंदर किए जा रहे हैं ताकि एक निश्चित दूरी पर हर जानवर के लिए पशु पक्षी को पानी मिल सके रोजाना टैंकर से सप्लाई भी की जाएगी. रोज इनका पीएच मान चेक किया जाएगा.
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 450 कर्मचारी
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 450 कर्मचारी काम करते हैं. 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हो गया है, जो हर किसी वन कर्मी के लिए चुनौती भरा समय होता है. वन विभाग में फायर सीजन की तैयारी दिसंबर महीने से ही करना शुरू कर देते हैं एक तो फायर लाइन काटते हैं. इसका उद्देश्य फायर को रोकना नहीं फायर को बढ़ने से रोकना होता है. रोड के किनारे तीन-तीन मीटर से लेकर 20 मीटर तक चौड़ी लाइन होती है तो इस तरह की फायर लाइन कट चुकी है, एक तरह से सफाई होती है.
इसके अलावा कई लोग रंजिश की वजह से या कई लोग महुआ बिनाते समय लापरवाही से जंगल में आग लगा देते हैं. वह फैल जाती है उसे नियंत्रित करने के लिए हम अतिरिक्त फायर श्रमिक डेप्लॉय करते हैं. इस बार हमारी योजना है कि टाइगर रिजर्व में फायर वॉच टावर अतिरिक्त बन जाए इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा है. स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू होगा. आग बुझाने के लिए काफी इक्विपमेंट हैं. कहीं छोटी आग लगी है तो हमारे पास ब्लैंकेट है और अब स्प्रेयर भी रखने लगे हैं जो पहले नहीं होते थे. इस तरह से कोशिश से की पहले तो जंगल में आज ही ना लगे वह लेकिन मुश्किल होता है.
लोगों से अपील
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जंगल से ही पानी है जंगल से ही एक सिस्टम है यह जंगल आपका ही है. शासकीय कर्मचारी तो अपना काम करने आया है. ट्रांसफर होगा और चला जाएगा लेकिन इस जिले की जनता ही टाइगर रिजर्व की असली मालिक है, इसलिए आप जंगल को सुरक्षित रखें और हम प्रयास करेंगे कि कोई दुर्भावना बस आग लगा देता है तो उसको हम समय पर बुझा सकें.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें