आग से भरा लंबा गड्डा, लाल तपते अंगारे, चलते श्रद्धालु, MP के इस गांव में होली का नजारा

आग से भरा लंबा गड्डा, लाल तपते अंगारे, चलते श्रद्धालु, MP के इस गांव में होली का नजारा


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मध्य प्रदेश के आगर मालवा के लिंगोड़ा गांव में आस्था का एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जहां भक्त जलते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि यह परंपरा 200 साल से निभाई जा रही है और यहां पर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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आग पर चलते भक्त

आस्था जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान हर कठिनाई को सहज मान लेता है. मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के लिंगोड़ा गांव में होली के अवसर पर कुछ ऐसा ही अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है. यहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव प्रकट करने के लिए जलते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं. मान्यता है कि सच्चे विश्वास के साथ अग्नि-पथ पार करने से इच्छाएं पूर्ण होती हैं.

200 साल से चला आ रहा है यह आयोजन
आग से भरा एक लंबा गड्ढा. उसमें लाल तपते अंगारे और उन पर बेखौफ चलते श्रद्धालु. यह कोई करतब नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा है. ग्रामीण बताते हैं कि यह आयोजन करीब 200 साल से भी अधिक समय से लगातार होता आ रहा है. होली के दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद यह अनुष्ठान शुरू किया जाता है.

अंगारों से गुजरते हैं लोग
इसके लिए लगभग 9 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2 फीट गहरा गड्ढा बनाया जाता है. उसमें चंदन, पलाश और कदम की लकड़ियां डाली जाती हैं. लकड़ियों के पूरी तरह जल जाने के बाद जब वे अंगारों में बदल जाती हैं, तो उन्हें बराबर फैला दिया जाता है. इसके बाद श्रद्धालु कतारबद्ध होकर इस अग्नि-पथ पर चलते हैं. इस अनुष्ठान में पुरुषों के साथ महिलाएं और बुजुर्ग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर भी अंगारों से गुजरते हैं. उनका विश्वास है कि ईश्वर उनकी रक्षा करते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

ग्रामीणों के बीच यह भी मान्यता है कि जब भक्त अग्नि-पथ पर चलते हैं, तो मंदिर में विराजित हनुमान जी की प्रतिमा पर पसीने की बूंदें दिखाई देती हैं, जिसे लोग दिव्य संकेत मानते हैं. श्रद्धा, परंपरा और विश्वास का यह अनोखा संगम हर साल सैकड़ों लोगों को लिंगोड़ा गांव की ओर आकर्षित करता है.

हर साल लगता है मेला
जिला पंचायत सदस्य मोहनलाल मकवाना ने कहा कि बालाजी सरकार के यहां, जो भी मन्नत मांगते हैं. उनकी मनोकानाएं पूरी होती हैं. जो भी लोग यहां से गुजरते हैं, उनके पैर में जलन या छाला तक नहीं हुआ है. यह बालाजी सरकार की कृपा है. यहां सर्वसमाज के लोग आते हैं. कई महिलाएं बच्चे को लेकर अंगारों से निकलते हैं. यहां हर साल मेला लगता है और दो से तीन हजार लोग मेले में आते हैं.



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