झाबुआ जिले के ग्रामीण अंचलों में धुलेंडी का पर्व पारंपरिक ‘गल चूल’ उत्सव के रूप में मनाया गया। रायपुरिया, बिलिडोज, बावड़ी, करवड़ और टेमरिया सहित कई स्थानों पर आयोजित इस उत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। यहां मन्नतधारियों ने नंगे पैर दहकते अंगारों पर चलकर और ऊंचे ‘गल’ पर झूलकर अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की। 20 फीट ऊंचे ‘गल’ पर उल्टा लटके मन्नतधारी रायपुरिया में यह परंपरा पिछले 50 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। यहां चार खंभों पर स्थापित 20 फीट ऊंचे ‘गल’ पर मन्नतधारियों को उल्टा लटकाकर घुमाया गया। इस कठिन अनुष्ठान को पूरा करने के लिए श्रद्धालु एक सप्ताह पूर्व से ही सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से क्षेत्र पर दैवीय कृपा बनी रहती है। अंगारों पर बच्चों को लेकर चले श्रद्धालु चूल उत्सव के दौरान रोमांच तब बढ़ गया जब श्रद्धालु नंगे पैर धधकते अंगारों के बीच से निकले। कुछ मन्नतधारियों ने तो अपने मासूम बच्चों को गोद में लेकर अंगारों का रास्ता पार किया। ग्रामीणों की मान्यता है कि माता की कृपा से उन्हें आंच तक नहीं आती। करवड़ के अम्बे माता मंदिर में भी इसी तरह का आयोजन हुआ, जहाँ भारी भीड़ जमा रही। रानापुर में खाटू श्याम की पालकी और ‘मिनी भगोरिया’ सा नजारा रानापुर नगर में बाबा खाटू श्याम की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों और भजनों की धुन पर भक्त झूमते नजर आए। यहाँ चूल उत्सव के साथ-साथ मेलों जैसा माहौल भी देखने को मिला। झूलों और चकरी के कारण यहाँ का वातावरण ‘मिनी भगोरिया’ जैसा नजर आ रहा था, जिसका ग्रामीणों ने भरपूर आनंद लिया।। प्रशासन रहा अलर्ट भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार अनिल बघेल और टीआई निर्भयसिंह भूरिया के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। रायपुरिया से लेकर रानापुर तक प्रशासन और ग्राम पंचायतों ने पेयजल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिसके चलते सभी धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए
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