खरगोन के बामंदी गांव में होली के दूसरे दिन बुधवार को गाड़ा खिंचाई की प्राचीन परंपरा निभाई गई। इस दौरान लगभग डेढ़ टन वजनी नौ विशेष गाड़ों को 400 मीटर तक खींचा गया, जिन पर 500 लोग नंगे पैर सवार थे। इस आयोजन में क्षेत्र के लगभग 5 हजार लोग शामिल हुए। सूर्यास्त के समय गाड़ों की पूजा की गई। जयघोष के बीच ओझा को उनके सहायक कंधों पर बैठाकर लाए। श्रद्धालुओं ने खंडेराव बाबा के जयकारे लगाए। ओझा ने इन गाड़ों को 400 मीटर तक खींचा। बड़वा रामसिंह पटेल और खांडेराव महेश पटेल ने इस परंपरा को पूरा करने के लिए पूरे दिन उपवास रखा। परंपरा की शुरुआत भीलट बाबा मंदिर में पूजन के साथ हुई। सूर्यास्त के समय बड़वा और फिर खांडेराव बाबा ने लकड़ी की मकड़ी घुमाई। प्रत्येक वर्ष नौ बैलगाड़ियों को जोड़कर गाड़ा तैयार किया जाता था, लेकिन इस वर्ष नौ नए विशेष गाड़े तैयार कराए गए थे। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, गाड़ा खिंचाई की यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है, हालांकि इसकी शुरुआत कब हुई, यह कोई नहीं जानता। पूजा-पाठ और अन्य सभी व्यवस्थाएं लगभग 100 युवकों की एक टोली ने संभाली।
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