बदलेगा गौरीकुंज का नाम? किशोर कुमार के फैंस नाराज, जानें माजरा क्या है

बदलेगा गौरीकुंज का नाम? किशोर कुमार के फैंस नाराज, जानें माजरा क्या है


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Khandwa News: गौरीकुंज कला मंदिर का शिलान्यास जून 1983 में अशोक कुमार ने तत्कालीन राज्यमंत्री के साथ मिलकर किया था. किशोर कुमार यह ऑडिटोरियम अपने माता-पिता कुंजलाल गांगुली और गौरी देवी की स्मृति में बनवाना चाहते थे ताकि खंडवा के स्थानीय कलाकारों को एक मंच मिल सके.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की याद से जुड़ा गौरीकुंज सभागृह एक बार फिर चर्चा में है. नगर निगम अब इस सभागृह को गीता भवन के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहा है. जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया, किशोर प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है. उनका कहना है कि पहले ही किशोर दा के बंगले को लेकर विवाद और संरक्षण की मांग चल रही है, अब उनके माता-पिता की स्मृति से जुड़े इस ऑडिटोरियम का स्वरूप बदलना सही नहीं है. दरअसल प्रदेश सरकार हर जिले में गीता भवन बनाने की योजना पर काम कर रही है. खंडवा में नई जमीन नहीं मिलने के कारण नगर निगम ने गौरीकुंज सभागृह के आंशिक पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है. करीब दो करोड़ रुपये की लागत से यहां लाइब्रेरी, रीडिंग रूम और कैफेटेरिया बनाने की योजना है, जिसका संचालन पीपीपी मोड पर किया जाएगा. यानी नाम और संचालन व्यवस्था दोनों में बदलाव संभव है.

गौरीकुंज कला मंदिर का शिलान्यास जून 1983 में अशोक कुमार ने तत्कालीन राज्यमंत्री के साथ किया था. यह ऑडिटोरियम किशोर कुमार अपने माता-पिता कुंजलाल गांगुली और गौरी देवी की स्मृति में बनवाना चाहते थे ताकि खंडवा के स्थानीय कलाकारों को मंच मिल सके. किशोर दा के निधन के बाद निर्माण कार्य कुछ समय के लिए अटक गया था लेकिन बाद में शासन की मदद से इसे पूरा किया गया.

किशोर नाइट से जुटाई थी राशि
बताया जाता है कि वर्ष 1982 में खुद किशोर कुमार ने ‘किशोर नाइट’ नाम से कंसर्ट कर ऑडिटोरियम निर्माण के लिए राशि जुटाई थी. उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर एक समिति भी बनाई थी ताकि खंडवा में कला और संस्कृति को बढ़ावा मिल सके. यही कारण है कि गौरीकुंज को सिर्फ एक भवन नहीं बल्कि किशोर दा के सपने के रूप में देखा जाता है.

नई जमीन की तलाश करे निगम
लोकल 18 से बातचीत में किशोर प्रेरणा मंच से जुड़े सुनील जैन ने कहा कि गौरीकुंज को देखने देश-विदेश से लोग आते हैं. यह सिर्फ एक ऑडिटोरियम नहीं बल्कि खंडवा की पहचान है. उनका कहना है कि नगर निगम को गीता भवन के लिए अलग जमीन तलाशनी चाहिए लेकिन गौरीकुंज का नाम और स्वरूप नहीं बदलना चाहिए. प्रशंसकों का मानना है कि खंडवा की पहचान ही किशोर कुमार से है. ऐसे में उनकी स्मृति से जुड़े स्थल का नाम बदलना या उसे किसी अन्य रूप में परिवर्तित करना सांस्कृतिक धरोहर के साथ न्याय नहीं होगा. अब देखना होगा कि नगर निगम इस प्रस्ताव पर आगे क्या फैसला लेता है. फिलहाल गौरीकुंज को लेकर शहर में भावनात्मक माहौल बना हुआ है और किशोर प्रेमी इसे यथावत रखने की मांग कर रहे हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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