मिर्च के कच्चे व्यापार को बनाया मसाला उद्योग, 10 लाख सब्सिडी, चेतराम की कहानी

मिर्च के कच्चे व्यापार को बनाया मसाला उद्योग, 10 लाख सब्सिडी, चेतराम की कहानी


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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के चेतराम मालवीया पहले मिर्च का व्यापार करते थे. फिर उन्होंने शासन की योजना का लाभ लेकर मसाला उद्योग शुरू किया. योजना में उन्हें 40 लाख 50 हजार रुपये का लोन मिला, जिसमें 10 लाख रुपये का अनुदान मिला. उन्होंने इससे मिर्च का पाउडर मसाला तैयार करके बेचना शुरू किया. आज उनका प्रोडक्ट देशभर में सप्लाई होता है.

खरगोन जिले के बेड़ियां गांव के चेतराम मालवीया कभी मंडी में कच्ची मिर्च की खरीद-फरोख्त का काम किया करते थे. इसमें मुनाफा सीमित था और मेहनत ज्यादा थी लेकिन आज वही चेतराम मसाला उद्योग चला रहे हैं और उनका प्रोडक्ट देशभर में सप्लाई हो रहा है.

खरगोन जिला मिर्च उत्पादन के लिए पहले से पूरे देश में जाना जाता है. यहां के किसान बड़े पैमाने पर मिर्च उगाते हैं. चेतराम भी इसी बाजार से जुड़े थे. व्यापार के दौरान उन्हें समझ आया कि असली कमाई कच्चा माल बेचने में नहीं बल्कि उसे प्रोसेस करके ब्रांड के साथ बेचने में है. यही सोच उनके स्टार्टअप की नींव बनी.

चेतराम ने लोकल 18 को बताया कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत आवेदन किया. योजना से उन्हें 40 लाख 50 हजार रुपये का लोन मिला. इसमें 10 लाख रुपये का अनुदान शामिल था. इस मदद से उन्होंने मशीनें खरीदीं और अपनी मसाला यूनिट शुरू की.

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बैंक से फाइनेंस मिलने के बाद उन्होंने सांवरिया उद्योग नाम से यूनिट स्थापित की. यहां मिर्च पाउडर के साथ हल्दी और धनिया पाउडर भी तैयार किया जाने लगा. शुरुआत में बाजार बनाना चुनौती था लेकिन उन्होंने क्वालिटी और सही पैकिंग पर फोकस किया.

उन्होंने बताया कि पहले सिर्फ मिर्च खरीदकर बेचते थे. अब वही मिर्च साफ की जाती है, सुखाई जाती है और मशीन से पीसकर पैक की जाती है. इससे प्रोडक्ट की कीमत बढ़ी और मुनाफा भी बढ़ा. रोजाना करीब 20 से 25 क्विंटल मसाला तैयार होता है. महीने में लगभग 20 दिन उत्पादन चलता है.

इस यूनिट में पांच स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार मिला है. गांव के युवाओं को घर के पास काम मिला. इससे आय बढ़ी और पलायन कम हुआ. एक छोटे व्यापारी का स्टार्टअप अब पांच लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बन गया है.



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