होली पर बुंदेलखंड में दिया जाता खास संदेश, रंगों से भर जाती है सूनी जिंदगी

होली पर बुंदेलखंड में दिया जाता खास संदेश, रंगों से भर जाती है सूनी जिंदगी


Last Updated:

Sagar Unique Holi Parampara: बुंदेलखंड में होली की एक अनोखी परंपरा है जहां फाग मंडली उन घरों में जाती है जिनमें पिछले एक साल में किसी की मृत्यु हुई हो. शोक की अवधि के बाद धुरेड़ी से पंचमी तक रंग-गुलाल लगाकर परिवार को फिर से समाज की मुख्य धारा में शामिल किया जाता है. ढोलक, मृदंग और राधा-कृष्ण के गीतों के बीच दुखी परिवारों को जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया जाता है. पंचमी को पचरंगी के रूप में मनाया जाता है और इसे नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यह परंपरा बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है.

Sagar ki Anokhi Holi: बुंदेलखंड में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि टूटे दिलों को जोड़ने की परंपरा भी है. यहां अगर किसी परिवार में मृत्यु हो जाए तो पूरे एक साल तक घर में कोई शुभ काम नहीं होता. शादी-ब्याह, ढोल-नगाड़े, मकान बनवाना सब वर्जित रहता है. घर का माहौल जैसे ठहर सा जाता है.

लेकिन जैसे ही होली आती है, तस्वीर बदल जाती है. धुरेड़ी से पंचमी तक गांव-गांव फाग की मंडलियां निकलती हैं. ये मंडलियां खास तौर पर उन घरों में जाती हैं, जहां पिछले साल किसी का निधन हुआ हो. वहां होली और कान्हा के गीत गाती हैं, रंग-गुलाल लगाती हैं और उस परिवार को फिर से समाज की मुख्य धारा में शामिल करती हैं.

सदियों पुरानी परंपरा
लोक कलाकार और पद्मश्री स्वर्गीय राम सहाय पांडे के पुत्र संतोष पांडे बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. गांव वाले फाग मंडली बनाकर शोकाकुल परिवार के घर जाते हैं. वहां ढोलक, मृदंग, मंजीरे और नगाड़े की थाप पर होली गीत गाए जाते हैं. गीतों के जरिए संदेश दिया जाता है जो होना था, वह हो गया. मृत्यु अटल है. अब दुख को पीछे छोड़कर जीवन की ओर लौटो.

पंचमी का खास महत्व
बुंदेलखंड में पंचमी को “पचरंगी” भी कहा जाता है. मान्यता है कि शरीर पांच तत्वों से बना है, इसलिए पंचमी के दिन पांच रंग लगाकर नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक दिया जाता है. एक साल तक जिन घरों में शादी-ब्याह जैसे काम रुके रहते हैं, वे होली के बाद फिर से शुरू हो सकते हैं. फाग मंडली का जाना जैसे एक संकेत होता है अब ग़म की अवधि खत्म, जीवन फिर से रंगों से भरने का समय आ गया.

राधा-कृष्ण के गीतों से गूंजता गांव
फाग की शुरुआत होलिका दहन से ही हो जाती है. जैसे ही होली जलती है, रंग-गुलाल के साथ वाद्य यंत्र बजने लगते हैं. मंडलियां रात में गांव के मंदिरों में जाती हैं और फिर दूसरे दिन से दुखी परिवारों के घर. गीतों में राधा-कृष्ण की होली, महारास और प्रेम की झलक होती है. यह परंपरा सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का जरिया है.

About the Author

Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



Source link