पहले जस्टिस विशाल मिश्रा, फिर जस्टिस एसएन भट्ट और जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट। एमपी हाईकोर्ट के इतिहास में सभंवता पहला ऐसा केस आया है, जिसकी शुरुआती सुनवाई के लिए तीसरी बेंच तय की गई हैं। 2 बेंच ने इस मुकदमे की सुनवाई से इंकार कर दिया है। केस आबकार
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लाइसेंस निलंबन को दी गई है चुनौती सोम डिस्टलरीज प्रा. लि. और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज प्रा.लि. की ओर से दाखिल इस याचिका में 4 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आबकारी आयुक्त ने कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना सुनवाई का अवसर दिए की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। कंपनियों का कहना है कि लाइसेंस निलंबन से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक था। बिना नोटिस और सुनवाई के की गई कार्रवाई को उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैधानिक बताया है।
दो बेंच कर चुकी हैं सुनवाई से इंकार 6 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और अधिवक्ता आदित्य पाराशर ने दलीलें सुनने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था। 24 फरवरी को जस्टिस मिश्रा के मामले से हटने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने प्रशासनिक स्तर पर जस्टिस एसएन भट्ट के समक्ष इस याचिका को सूचीबद्ध करने के निर्देश 25 फरवरी को दिए थे। इसके बाद यह मुकदमा जस्टिस भट्ट की अदालत में बीते शुक्रवार को सूचीबद्ध था, लेकिन उन्होंने भी इस मामले की सुनवाई से इंकार कर दिया था।
सोम डिस्टिलरीज की याचिका पर दो जजों के सुनवाई न करने के बाद अंतत: जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस के आदेश पर मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच में नियत की गई है। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने शराब कंपनी सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस रद्द कर दिया है। जिसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने सोम डिस्टिलरीज के सभी लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। करीब 20 दिन पहले रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड और मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्रा. लि. का लाइसेंस आबकारी आयुक्त ने सस्पेंड कर दिया है। तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार कंपनियों के संचालक, प्रतिनिधि, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर जिला इंदौर के एक प्रकरण में पारित निर्णय के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर द्वारा संबंधित आपराधिक अपीलों में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी है।