मुरैना. मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित एक महत्वपूर्ण संपर्क परियोजना अब लगभग तैयार हो चुकी है. मुरैना जिले के सेवरघाट पर चंबल नदी के ऊपर बना नया पुल क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बड़ा बदलाव लाने वाला है. इस पुल के बनने से मुरैना, जौरा और कैलारस क्षेत्र के लोगों को राजस्थान के करौली तक पहुंचने के लिए अब लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. अभी तक यात्रियों को मुरैना, धौलपुर, बाड़ी और सरमथुरा होते हुए लगभग 160 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. पुल शुरू होने के बाद यही दूरी लगभग 80 किलोमीटर रह जाएगी. इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत तीनों में बड़ी बचत होगी.
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल केवल एक ढांचागत परियोजना नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही परिवहन समस्या का समाधान भी है. चंबल नदी के इस हिस्से में पुल न होने के कारण आसपास के गांवों के लोगों को कई बार नाव से नदी पार करनी पड़ती थी. बारिश के मौसम में यह जोखिम और बढ़ जाता था. ऐसे में इस पुल के बनने से सुरक्षित और सुगम आवागमन का रास्ता खुल जाएगा. व्यापार, पर्यटन और सामाजिक संपर्क के लिहाज से भी यह मार्ग मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा.
सेवरघाट पुल: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति
चंबल नदी पर बना सेवरघाट पुल लगभग 720 मीटर लंबा और करीब 10 मीटर चौड़ा बनाया गया है. यह पुल कई पिलरों पर खड़ा है और तकनीकी रूप से इसे हाई लेवल ब्रिज के रूप में डिजाइन किया गया है ताकि बारिश या नदी में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में भी यातायात प्रभावित न हो. पुल का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, हालांकि अभी राजस्थान की ओर एप्रोच रोड का कुछ काम शेष है. अधिकारियों के अनुसार यह कार्य पूरा होते ही पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी.
दूरी आधी, समय और खर्च में बड़ी बचत
इस पुल के चालू होने से मुरैना, जौरा और कैलारस के लोगों को करौली जाने के लिए पहले की तुलना में लगभग आधी दूरी तय करनी होगी. अभी तक लोगों को लंबा मार्ग लेना पड़ता था, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ जाते थे. पुल शुरू होने के बाद यह दूरी करीब 80 किलोमीटर रह जाएगी. इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है. राजस्थान से आने वाला पत्थर, कोटा स्टोन, किराना और कपड़ा कारोबार सीधे मध्य प्रदेश के बाजारों तक पहुंच सकेगा.
राजस्थान के करौली स्थित प्रसिद्ध कैला देवी मंदिर जाना होगा आसान
मुरैना और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजस्थान के करौली स्थित प्रसिद्ध कैला देवी मंदिर के दर्शन करने जाते हैं. खासकर चैत्र नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. पुल शुरू होने के बाद इस मार्ग से यात्रा काफी आसान हो जाएगी. श्रद्धालुओं को लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और यात्रा समय भी काफी कम हो जाएगा. इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की संभावना है.
व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ
पुल बनने से सीमावर्ती जिलों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी. पत्थर उद्योग, निर्माण सामग्री, किराना और अन्य व्यापारों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित होगा. स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि नई सड़क कनेक्टिविटी से परिवहन लागत कम होगी और बाजारों तक पहुंच आसान होगी. इससे दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है.
एप्रोच रोड पूरा होते ही शुरू होगा आवागमन
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पुल का मुख्य ढांचा तैयार हो चुका है और अब राजस्थान क्षेत्र में एप्रोच रोड का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. यह काम पूरा होते ही पुल को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. स्थानीय लोग भी लंबे समय से इस पुल के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी.